15 या 16 जनवरी? माघ महीने के पहले प्रदोष व्रत की सही तिथि क्या है? जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त भी

Lord Shiva Pradosh Vrat: साल 2026 में माघ मास का पहला प्रदोष व्रत 16 जनवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा। यह दिन माघ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि में पड़ता है, जिसमें प्रदोष काल शाम 5:47 बजे से 8:29 बजे तक।
Pradosh Vrat 2026 Puja Rituals
भगवान शिव (सौ.सोशल मीडिया)
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Pradosh Vrat 2026 Puja Rituals:देवअधिदेव की कृपा पाने के लिए प्रदोष व्रत हिंदू धर्म में सबसे शुभ दिन माना गया है। जो हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इस बार माघ महीने का प्रदोष व्रत बहुत ही शुभ बताया जा रहा है। क्योंकि यह नए साल की शुरुआत और मकर संक्रांति के ठीक बाद मनाया जा रहा है।

पंचांग  के अनुसार, साल 2026 में माघ मास का पहला प्रदोष व्रत 16 जनवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा। यह दिन माघ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि में पड़ता है, जिसमें प्रदोष काल शाम 5:47 बजे से 8:29 बजे तक रहेगा। इसी समय भगवान शिव का पूजा-अर्चना करना सबसे शुभ माना जाता है।

 माघ मास का पहला प्रदोष व्रत 2026 में कब पड़ रहा है

आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, इस वर्ष, माघ महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 जनवरी को रात 8 बजकर 16 मिनट पर शुरू होगी। इस तिथि का समापन 16 जनवरी को रात 10 बजकर 21 मिनट पर होगा। ऐसे में पंचांग को देखते हुए माघ महीने का पहला प्रदोष व्रत दिन शुक्रवार 16 जनवरी को रखा जाएगा।

कैसे करें प्रदोष व्रत की पूजा

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
  • दिन भर सात्विक रहें और शिव मंत्रों का मन ही मन जाप करें।
  • शाम को सूर्यास्त से करीब 45 मिनट पहले दोबारा स्नान करें।
  • इसके बाद भगवान शिव का गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें।
  • उन्हें बिल्व पत्र, धतूरा, आक के फूल और भस्म अर्पित करें।
  • प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें और अंत में आरती करें।
  • पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगें।

गुरु प्रदोष व्रत का क्या है धार्मिक महत्व

गुरु प्रदोष व्रत रखने से शिक्षा, ज्ञान और संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसके अलावा जो लोग आर्थिक तंगी से परेशान हैं या जिनके करियर में रुकावटें आ रही हैं, उनके लिए यह व्रत बहुत मंगलकारी माना जाता है। यह भी कहा जाता है कि इस दिन शिव मंदिर में दीपदान करने से जीवन के सभी अंधकार दूर हो जाते हैं।

प्रदोष व्रत रखते समय किन बातों का रखें ध्यान

  • प्रदोष की पूजा हमेशा कुश के आसन पर बैठकर करें।
  • पूजा के समय उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख रखें।
  • इस दिन अन्न का सेवन वर्जित होता है, शाम की पूजा के बाद ही फलाहार करें।
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