

Gaya Pind Daan Mahatva: हिंदू धर्म में पितृपक्ष को पूर्वजों के तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों का पिंडदान और श्राद्ध आदि करते है। पितृ पक्ष में बिहार के गया को पिंडदान और श्राद्ध के लिए बेहद खास माना जाता है।
बताया जाता है कि, गया में फल्गु नदी के किनारे पिंडदान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। यही वजह है कि पितृ पक्ष में देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म करने पहुंचते हैं. लेकिन हर किसी के लिए गया जाना संभव नहीं होता है।
धार्मिक ग्रंथों में गया को पिंडदान के लिए प्रमुख तीर्थ माना गया है। मान्यता है कि गयाजी में किया गया श्राद्ध और पिंडदान पितरों को विशेष फल प्रदान करता है। ये भी मान्यता है कि गयाजी में विधि-विधान से पिंडदान करने पर पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उन्हें जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है। साथ ही उस परिवार की सात पीढ़ियों का भी उद्धार होता है।
गया को पिंडदान के लिए प्रमुख तीर्थ माना गया है। लेकिन,यदि आप किसी कारणवश गया जाने में असमर्थ हैं तो अपने दिवंगत परिजनों का श्राद्ध और पिंडदान घर पर भी कर सकते है। इसके लिए इन नियमों का पालन करें।
दक्षिण दिशा पर बैठकर अपने पूर्वजों को याद करें और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें।
जल में काले तिल मिलाकर पितरों को तर्पण करे।
तर्पण करते समय पूर्वजों का नाम लेकर उनका स्मरण करें।
चावल और दूसरी पारंपरिक सामग्री से पिंड बनाकर पितरों को अर्पित करें।
परिवार की परंपरा के अनुसार इसकी विधि अलग हो सकती करें।
श्राद्ध के दिन सात्विक भोजन तैयार करके पितरों के नाम से भोग लगाने की परंपरा करें।
अपनी क्षमता के अनुसार ब्राह्मण, बुजुर्ग या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना और दान देना शुभ माना जाता है।
धार्मिक परंपरा में गाय, कुत्ते, कौए और दूसरे जीवों को भोजन देने का भी जिक्र मिलता है।