भगवान विष्णु(सौ.AI)
Papmochani Ekadashi Kya Kare Aur Kya Na Kare: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का अपना एक विशेष आध्यात्मिक महत्व है। लेकिन, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली ‘पापमोचिनी एकादशी’ को सबसे खास माना गया है। इस साल 15 मार्च को यह पावन पर्व मनाया जाएगा।
धर्म शास्त्रों के अनुसार, इस दिन कुछ ऐसे कार्य भी बताए गए हैं जिन्हें करने से व्रत का फल कम हो सकता है। इसलिए पापमोचनी एकादशी के दिन इन कामों से विशेष रूप से बचना चाहिए।
हिन्दू शास्त्रों के मुताबिक, पापमोचनी एकादशी के दिन चावल नहीं खाने चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चावल खाने से घर में दरिद्रता आती है। ऐसे में जो लोग पापमोचनी एकादशी का उपवास नहीं भी कर रहे हैं, उन्हें भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
इस दिन चावल के अलावा, कुछ विशेष प्रकार चीजें मसूर की दाल, गोभी, गाजर, शलजम, बैंगन, पालक के सेवन से भी बचना चाहिए।
कहा जाता है कि, पापमोचनी एकादशी के दिन तुलसी पूजा का विधान है। ऐसे में इस दिन भूलकर भी तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।
इस दिन बाल और नाखून काटने से मनाही होती है।
एकादशी के दिन मन को शांत रखना बहुत जरूरी होता है। इस दिन किसी से झगड़ा, बहस या अपशब्द बोलने से बचना चाहिए।
एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान विष्णु का स्मरण करना चाहिए। देर तक सोना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता है।
भगवान विष्णु के स्वरूप की गंगाजल, चंदन, तुलसी फूल और मिठाई से पूजा करें।
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें और पापमोचनी एकादशी की व्रत कथा जरूर पढ़ें या सुनें।
गरीब और जरूरतमंद लोगों को अन्न, तिल, वस्त्र या धन का दान करने से पुण्य प्राप्त होता है।
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शाम के समय तुलसी के पौधे के सामने घी का दीपक जलाएं और 11 बार परिक्रमा करें।
मन में शांति बनाए रखें और क्रोध, झूठ या किसी की बुराई करने से बचें।