साल 2025 की सावन पूर्णिमा इस दिन, नोट कर लीजिए शुभ मुहूर्त, इस पूर्णिमा का महत्व
वैसे तो पूरे साल में कुल 12 पूर्णिमा तिथि होती है. लेकिन सावन महीने की पूर्णिमा बहुत ही खास मानी जाती है। इस दिन रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है और भगवान शिव की पूजा-आराधना भी होती है।
- Written By: सीमा कुमारी
सावन पूर्णिमा 2025 (सौ.सोशल मीडिया)
देवाधिदेव महादेव को समर्पित सावन का महीना 11 जुलाई से शुरू हो रहा है और 9 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगा। इस माह को भोलेनाथ की आराधना के लिए सबसे शुभ एवं उत्तम माना गया है। इस महीने में सच्चे मन से की गई शिव जी की अराधना से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
कहा जाता है सावन माह भोलेनाथ को बहुत प्रिय है। श्रावण मास के अंतिम दिन पूर्णिमा होती है, जिसे कजरी या श्रावणी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। आपको बता दें कि, इस साल 2025 में सावन महीने की पूर्णिमा 9 अगस्त को है।
पूरे साल में कुल 12 पूर्णिमा तिथि आती हैं, लेकिन सावन की पूर्णिमा का खास महत्व होता है। इस दिन भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन भी मनाया जाता है। इस दिन व्रत रखने और स्नान-दान करने का विशेष महत्व होता है। आइए यहां जानते हैं साल 2025 में किस दिन पड़ेगी श्रावण माह की पूर्णिमा।
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कब मनाई जाएगी सावन पूर्णिमा 2025
आपको बता दें,पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ 8 अगस्त 2025, दोपहर 2.12 बजे।
पूर्णिमा तिथि समाप्त 9 अगस्त 2025 1.24 बजे।
साल 2025 में सावन माह की पूर्णिमा 9 अगस्त को पड़ेगी।
चंद्रोदय का समय शाम 6.45 बजे रहेगा।
सावन पूर्णिमा के दिन क्या करना शुभ
- आपको बता दें, हिन्दू धर्म में सावन पूर्णिमा का बड़ा महत्व है। इस पावन तिथि पर स्नान-दान का भी विशेष महत्व होता है।
- इस दिन भगवान विष्णु और भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करें।
- पूर्णिमा तिथि के दिन व्रत करें और उसका पालन करें।
- पूर्णिमा तिथि पर रात्रि समय चंद्र को अर्घ्य दें, इसका बाद पूर्णिमा का व्रत संपूर्ण माना जाता है।
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क्या है सावन पूर्णिमा का महत्व
सनातन धर्म में सावन पूर्णिमा का बड़ा महत्व होता है। आपको बता दें, पंचाग के अनुसार श्रावण माह की पूर्णिमा वर्ष की पांचवीं पूर्णिमा है। यह दिन धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन अनेक प्रमुख त्योहार, व्रत रखे जाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाती है।
सावन पूर्णिमा के दिन रक्षा बन्धन का पर्व मनाया जाता है। रक्षा बन्धन के दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं यह पर्व भाई-बहन के पवित्र प्रेम एवं कर्तव्य को दर्शाता है।
