नीम और मिश्री खाकर क्यों की जाती है हिंदू नव वर्ष की शुरुआत? इसके साथ ही जानिए इस साल कौन सा ग्रह रहेगा राजा
Gudi Padwa Neem Mishri Rituals: हिंदू नव वर्ष की शुरुआत नीम और मिश्री खाकर करने की परंपरा का विशेष महत्व है। यह जीवन में सुख-दुख के संतुलन का प्रतीक माना जाता है।
- Written By: सीमा कुमारी
हिंदू नववर्ष पर नीम और मिश्री की परंपरा(सौ.AI)
Gudi Padwa Neem Kyu Khate Hai : 19 मार्च से हिंदू नववर्ष की शुरुआत हो रही है। भारतीय परंपरा में हर त्योहार और धार्मिक अनुष्ठान के पीछे कोई न कोई आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व जरूर जुड़ा होता है। ऐसा ही एक विशेष परंपरागत रिवाज हिंदू नववर्ष की शुरुआत से भी जुड़ा है। देश के कई हिस्सों में नवसंवत्सर या हिंदू नववर्ष के पहले दिन नीम की पत्तियां खाने की विशेष परंपरा भी है।
नीम की पत्तियां खाना: कड़वे और मीठे अनुभव का प्रतीक
ऐसा माना जाता है कि, हिंदू नववर्ष के पहले दिन नीम की पत्तियां खाने से जीवन में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह परंपरा जीवन के कड़वे और मीठे अनुभव प्राप्त करने का प्रतीक है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। इस दिन को नवसंवत्सर, गुड़ी पड़वा और उगादी जैसे नामों से भी मनाया जाता है।
सम्बंधित ख़बरें
Shani Pradosh Vrat 2026: शनि प्रदोष व्रत पर करें ये खास उपाय, दूर हो सकते हैं शनिदेव के अशुभ प्रभाव
Shani Dev Signs :शनिवार को दिख जाएं ये 5 चीजें तो समझें चमक गई किस्मत, साक्षात शनि देव देते हैं ये बड़ा संकेत
Skanda Sashti 2026: स्कंद षष्ठी पर भगवान कार्तिकेय को लगाएं इन 5 खास चीजों का भोग, हर संकट से मिलेगी मुक्ति
Money Plant Vastu Tips: घर में लगा है मनी प्लांट तो भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना रूठ सकती हैं मां लक्ष्मी
धर्म शास्त्रों के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना की थी इसलिए इस तिथि को नववर्ष और नई शुरुआत का दिन माना जाता है। इस वर्ष के राजा गुरु और मंत्री मंगल देव रहने वाले हैं, जब गुरु और मंगल का संयोग बनता है तब धर्म योद्धा योग कहा जाता है।
क्यों खाते हैं नीम के पत्ते और मिश्री?
गुड़ी पड़वा और उगादी के मौके पर सुबह स्नान-पूजन के बाद लोग नीम की कोमल पत्तियां और मिश्री या गुड़ का सेवन करते है। कई जगहों पर नीम की पत्तियों को इमली, गुड़ या कच्चे आम के साथ मिलाकर खाया जाता है।
धर्माचार्यों के अनुसार नीम और मिश्री जीवन के दो महत्वपूर्ण पहलुओं का प्रतीक माने जाते है। नीम का कड़वा स्वाद जीवन की कठिनाइयों और चुनौतियों को दर्शाता है, जबकि मिश्री की मिठास सुख, सफलता और खुशियों का प्रतीक होती है।
इस परंपरा के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि जीवन में सुख-दुख दोनों का संतुलन होता है और व्यक्ति को हर परिस्थिति को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
आयुर्वेद के लिहाज से नीम की पत्ती खाना शुभ
आयुर्वेद की दृष्टि से भी यह परंपरा बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। मौसम के बदलने के समय यानी बसंत से गर्मी की ओर जाते मौसम में शरीर में कई तरह के संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
ऐसे में नीम में मौजूद औषधीय गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करते है। वहीं मिश्री शरीर को ऊर्जा देने और नीम की कड़वाहट को संतुलित करने का काम करती है।
विशेषज्ञों के अनुसार नीम में एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और रक्त शुद्ध करने वाले गुण पाए जाते है। इसलिए नववर्ष की शुरुआत में इसका सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।
ये भी पढ़ें– हिंदू नव वर्ष के पहले दिन ब्रह्र्म मुहूर्त में करें ये काम, सालभर मिलेगा शुभ फल और खुशियों का साथ
कौन होंगे राजा और मंत्री?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जिस दिन नव वर्ष शुरू होता है, उसी दिन का ग्रह उस वर्ष का राजा माना जाता है, इस बार नववर्ष गुरुवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए वर्ष के राजा गुरु ग्रह होंगे, जबकि मंत्री मंगल को माना जा रहा है।
साथ ही इस वर्ष के सेनापति, मेघाधिपति और फलधिपति चंद्र देव रहने वाले है। गुरु ग्रह विक्रम संवत 2083 के राजा के साथ-साथ नीरसाधिपति, धनाधिपति और सस्याधिपति रहने वाले है। वहीं बुध ग्रह धान्याधिपति बुध ग्रह तो रसाधिपति शनिदेव रहने वाले है।
