नवरात्र के चौथे दिन वासुदेव चतुर्थी, इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा, विघ्नहर्ता की कृपा से दूर होंगे सभी कष्ट
Ganesh Puja Navratri Day Four: नवरात्र के चौथे दिन वासुदेव चतुर्थी का विशेष महत्व है। इस दिन शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की पूजा करने से सभी विघ्न दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
- Written By: सीमा कुमारी
विघ्नहर्ता भगवान गणेश (सौ. Gemini)
Vasudev Chaturthi 2026: आदि शक्ति मां दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित चैत्र नवरात्रि का महापर्व देशभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन भगवान गणपति को समर्पित विनायक चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। इस बार यह व्रत रविवार 22 मार्च को रखा जा रहा है। इसे वासुदेव चतुर्थी के नाम से जाना जाता है।
चैत्र माह की विनायक चतुर्थी का विशेष महत्व है, क्योंकि इस व्रत में विघ्नहर्ता की पूजा के साथ मां दुर्गा की चौथी शक्ति मां कूष्मांडा की आराधना भी की जाती है। इस दिन गौरी पुत्र गणेश जी की पूजा से हर कार्य में सफलता मिलती है और धन सुख, समृद्धि, संतान सब मिलते हैं। घर आंगन में खुशियों का आगमन होता है।
चैत्र विनायक चतुर्थी पर भद्रा का साया रहेगा
ज्योतिषयों के अनुसार, इस बार विनायक चतुर्थी के दिन सुबह से भद्रा लग रही है, लेकिन उस दिन रवि योग भी बन रहा है। बताया जा रहा है कि, इस व्रत में गणेश जी की पूजा कर सकते हैं लेकिन चंद्रमा को देखना वर्जित होता है। चंद्रमा का दर्शन करने से झूठा कलंक लगने की आशंका रहती है।
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विनायक चतुर्थी का आध्यात्मिक महत्व
धर्म शास्त्रों में बताया है कि, इस दिन जो भी व्यक्ति व्रत रखते है, उन पर भगवान गणेश की कृपा बरसती है। उनकी कृपा से लोगों को ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही घर में बरकत आती है।
चैत्र विनायक चतुर्थी की तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 21 मार्च 2026 को रात 11.56 पर शुरू होगी और अगले दिन 22 मार्च 2026 को रात 9.16 पर समाप्त होगी। इस दिन भगवान गणेश के वासुदेव रूप की पूजा-अर्चना की जाती है।
चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त – सुबह 11:15 – दोपहर 01:41
वर्जित चन्द्रदर्शन का समय – सुबह 08:15 – रात 10:15
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वासुदेव विनायक चतुर्थी पूजा विधि
- सर्वप्रथम प्रातःकाल स्नानोपरान्त शुद्ध वस्त्र धारण कर संकल्प लें।
- उसके बाद पूजन स्थल पर लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान गणपति की मूर्ति स्थापित करें।
- दूर्वा, लड्डू, मोदक, सिन्दूर, शमीपत्र तथा सुपारी अर्पित करते हुये भगवान गणेश का षोडशोपचार पूजन करें।
- तत्पश्चात् गणपति अथर्वशीर्ष, ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र, सङ्कटनाशन गणेश स्तोत्र आदि का पाठ कर भगवान गणेश को प्रसन्न करें।
- व्रत की सफलता हेतु वासुदेव चतुर्थी व्रत कथा का श्रवण अथवा पाठ करें।
- मुद्गलपुराण के अनुसार पञ्चमी तिथि को ब्राह्मण के समक्ष विधिवत् व्रत का पारण करें।
