Narali Purnima 2026: समुद्र पूजा से लेकर नारली भात तक, जानें इस खास त्योहार में निभाई जाने वाली खास रस्में

Narali Purnima: सावन पूर्णिमा के दिन महाराष्ट्र के समुद्री इलाकों में नारली पूर्णिमा का त्मयोहार मनाया जाता है। समुद्र पूजा, नारियल चढ़ाने, रक्षाबंधन और नारली भात से जुड़ी इस त्योहार की खास परंपराएं।
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नारली पूर्णिमाफोटो.एआई
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Narali Purnima Festival: सावन पूर्णिमा को नारली पूर्णिमा के रूप में महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में मनाया जाता है। इस त्योहार को खासकर कोली मछुआरा समुदाय द्वारा सेलिब्रेट किया जाता है। श्रावण महीने की पूर्णिमा के दिन समुद्र की पूजा की जाती है और नारियल चढ़ाया जाता है। इस दिन रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाता है। इसलिए यह त्योहार धार्मिक होने के साथ-साथ परिवार और समाज से भी जुड़ा हुआ है।

समुद्र की पूजा करने की है परंपरा

मानसून के दौरान समुद्र अपने उफान पर होता है। ऐसे में मछुआरा समुदाय समुद्र की पूजा करता है और सुरक्षित मछली पकड़ने के मौसम की शुरुआत की कामना करता है। समुद्र को नारियल यानी श्रीफल चढ़ाया जाता है। इसे समुद्र के प्रति सम्मान और आभार जताने का तरीका माना जाता है।

नारियल से बनते हैं खास पकवान

नारली पूर्णिमा के मौके पर कई प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं, जिसमें नारियल का इस्तेमाल किया जाता है। महाराष्ट्र में इस दिन नारली भात काफी पसंद किया जाता है। इसमें नारियल और गुड़ की मदद से मीठे चावल बनाए जाते हैं। इसके अलावा नारियल की मिठाई और वड़ियां भी बनाई जाती हैं।

नई शुरुआत का संदेश

नारली पूर्णिमा सिर्फ पूजा और परंपरा तक सीमित नहीं है। इस दिन समुद्र में नारियल चढ़ाया जाता है। इसका अर्थ है, लोग पुरानी नकारात्मकता को छोड़कर नई शुरुआत की ओर अग्रसर हो रहे हैं। यह त्योहार प्रकृति के प्रति सम्मान व्यक्त करने और आने वाले समय के लिए अच्छी उम्मीद का संदेश देता है।

सेहत के लिए भी नारियल खास

नारियल को पोषण से भरपूर माना जाता है। नारियल पानी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। वहीं नारियल के गूदे में अच्छी मात्रा में पोषक तत्व और गुड फैट होती है। मानसून के मौसम में थकान महसूस होने पर नारियल पानी एक अच्छा पेय हो सकता है।

त्वचा और बालों के लिए नारियल

नारियल तेल का इस्तेमाल लंबे समय से बालों की देखभाल के लिए किया जाता रहा है। यह बालों को नमी देने और रूखेपन को कम करने में मदद करता है। त्वचा की देखभाल में भी नारियल तेल का इस्तेमाल किया जाता है, खासकर रूखी त्वचा पर नारियल तेल के इस्तेमाल से नमी बनी रहती है।

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रक्षाबंधन भी मनाया जाता है

नारली पूर्णिमा के दिन ही रक्षाबंधन का त्योहार भी आता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना करती है। भाई भी बहन की रक्षा करने का संकल्प लेता है। इस तरह यह दिन परिवार के लिए भी खास बन जाता है।

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