(सौजन्य सोशल मीडिया)
नाग पंचमी सावन के महीने में आती है जो भगवान शिव को समर्पित एक पवित्र महीना है। अबकी बार नागपंचमी 9 अगस्त को है। इस दिन भगवान शिव के गण माने जाने वाले नाग देवता की घर-घर में पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से धन बढ़ता है और सर्पदंश का भय दूर होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव बहुत ही प्रसन्न मुद्रा में होते हैं और भक्तों की हर मनोकामना पूरी होने का आशीर्वाद देते हैं।
हिंदू शास्त्रों के अनुसार, नागों को हमेशा एक विशेष स्थान दिया जाता है और उन्हें भगवान के रूप में पूजा जाता है। नाग पंचमी के इस शुभ दिन पर भक्त भगवान के रूप में नागों की पूजा करते हैं। लोग मिट्टी से सांप बनाते हैं और उन्हें अलग-अलग रूप देते हैं और उन्हें रंगते हैं, उनकी पूजा करते हैं और दूध और अन्य खाद्य पदार्थ चढ़ाते हैं। कई लोग विशेष रूप से दक्षिण भारत में नागों या सांपों से जुड़े मंदिरों में जाते हैं और उनकी पूजा करते हैं। सपेरे भी सांपों को लेकर सड़कों पर निकलते हैं और उन्हें दूध और पैसे चढ़ाए जाते हैं।
ज्योतिषाचार्य डॉ. मनीष व्यास के अनुसार इस साल नाग पंचमी के दिन कई अद्भुत संयोग बन रहे हैं जिससे इस पर्व की शुभता और बढ़ रही है। नागपंचमी के दिन हस्त नक्षत्र के शुभ संयोग में शिव वास योग, साध्य योग और सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। इन शुभ योगों में शिवजी की पूजा करने से भोले बाबा शीघ्र की आपकी प्रार्थना स्वीकार करते हैं और शीघ्र ही आपको पूजा का शुभ फल मिलता है। सोमवार के दिन नागपंचमी पड़ने से ये दिन और भी ज्यादा शुभ हो गया है
ज्योतिषाचार्य डॉ. मनीष व्यास के अनुसार नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा पूरे दिन में कभी भी की जा सकती है। पूजा का शुभ मुहूर्त 9 अगस्त को सुबह 5.47 से 8.27 बजे तक रहेगा। दोपहर में 12.13 से 1 बजे तक का समय भी पूजा के लिए शुभ है। इसके बाद प्रदोष काल में भी पूजा का शुभ महूर्त शाम को 6.33 से रात को 8.20 बजे तक रहेगा।
नाग पंचमी के दिन नाग देवता और शिव जी की पूजा करने से नाग के डसने और अकाल मृत्यु का खतरा टलता है। साथ ही भगवान शिव की पूजा से ग्रह दोष दूर होते हैं। नागों को धन का रक्षक माना गया है। इस वर्ष श्रावण शुक्ल पक्ष कालसर्प पूजा नागपंचमी के अवसर पर विशेष लाभकारी साबित होगा।
ज्योतिषाचार्य आदित्य नारायण मिश्र के अनुसार कालसर्प दोष दूर करने के लिए नागपंचमी पर नागों की पूजा लाभकारी रहती है। कालसर्प दोष दूर करने के लिए महामृत्युंजय सर्प गायत्री जाप अथवा त्रंबकेश्वर आदि तीर्थ स्थानों में सर्प पूजा का विधान है। इस दिन ओम नमः शिवाय अथवा महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। इसके साथ ही सर्प गायत्री का जाप करें। इस दिन नाग देवता और शिव पूजा से नाग के डसने और अकाल मृत्यु का खतरा टल जाता है। ग्रह दोषों से भी मुक्ति मिलती है।