प्रतिकात्मक तस्वीर (सौजन्य सोशल मीडिया)
हर साल की तरह इस बार भी सावन महीने के पूर्णिमा के दिन रक्षा बंधन का पावन त्योहार पूरे देशभर में बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। भाई-बहन के अटूट प्रेम के प्रतीक ‘रक्षाबंधन’ का पावन पर्व इस बार 19 अगस्त, सोमवार को मनाया जाएगा।
सनातन धर्म में प्यार और रिश्तों के त्योहार ‘रक्षा बंधन’ का बहुत अधिक महत्व है। लेकिन क्या आपको पता है कि राखी के त्योहार की शुरुआत कैसे हुई? आइए जानें रक्षाबंधन की शुरुआत से जुड़ी पौराणिक कथा-
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया था, तब उनकी उंगली में सुदर्शन चक्र से चोट लग गई थी। यह देखकर तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर बांध दिया था। यह देखकर श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को आशीर्वाद देते हुए कहा था कि वो उनकी साड़ी के इस टुकड़े की कीमत जरूर अदा करेंगे। कालान्तर में जब महाभारत में द्यूत क्रीड़ा के दौरान युद्धिष्ठिर द्रौपदी को हार गए थे, तब दुर्योधन की ओर से मामा शकुनि ने द्रौपदी को जीता था।
पांडवों को नीचा दिखाने और उनका अपमान करने के लिये तब दुशासन, द्रौपदी को बालों से पकड़कर घसीटते हुए सभा में ले आया था। यहां द्रौपदी का चीरहरण किया गया। इस दौरान द्रौपदी ने सबके सामने मदद की भीख मांगी। सभा में सभी को मौन देख अंत में द्रौपदी ने वासुदेव श्रीकृष्ण का आह्वान किया। श्रीकृष्ण को पुकारते हुये द्रौपदी ने कहा, “हे गोविंद! आज आस्था और अनास्था के बीच युद्ध है। मुझे देखना है कि क्या सही में ईश्वर है।” तब द्रौपदी की लाज बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने चमत्कार किया। वो द्रौपदी की साड़ी को तब तक लंबा करते गए जब तक दुशासन थक कर बेहोश नहीं हो गया। इस तरह श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की राखी की लाज रखी।
रक्षाबंधन को लेकर एक कथा सिकंदर से भी जुड़ी हई है। इतिहास में दर्ज इस कथा के अनुसार, सिकंदर पूरे विश्व को फतह करने निकला था। इस दौरान जब वह भारत आया तो उसका सामना यहां भारतीय राजा पुरु से हुआ। राजा पुरु बहुत वीर और बलशाली थे। उन्होंने युद्ध में सिकंदर को धूल चटा दी। इसी दौरान सिकंदर की पत्नी को भारतीय त्योहार रक्षाबंधन के बारे में पता चला। तब उन्होंने अपने पति सिकंदर की जान बख्शने के लिए राजा पुरु को राखी भेजी।
इस बात पर पुरु आश्चर्य में पड़ गए, लेकिन उन्होंने राखी के धागों का सम्मान करते हुए युद्ध के दौरान सिकंदर पर वार नहीं किया। युद्ध के दौरान सिकंदर पर वार करने के लिये जब पुरु ने अपना हाथ उठाया तो कलाई में राखी देखकर वे ठिठक गए और वार न कर सके। इस कारण उन्हें बंदी बना लिया गया। दूसरी ओर बंदी बने पुरु की कलाई में राखी को देखकर सिकंदर ने भी अपना बड़ा दिल दिखाया और पुरु को उनका राज्य वापस कर दिया।
लेखिका- सीमा कुमारी