Ashwatthama Chiranjeevi (Source. Pinterest)
Ashwatthama Chiranjeevi: हिंदू धर्म में सात ऐसे महान पुरुषों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें चिरंजीवी कहा गया है अर्थात जो सृष्टि के अंत तक धरती पर विद्यमान रहेंगे। ये सात चिरंजीवी हैं हनुमान जी, विभीषण, ऋषि वेदव्यास, कृपाचार्य, अश्वत्थामा, भगवान परशुराम और राजा बली। इन चिरंजीवियों को देख पाना सामान्य मानव के लिए असंभव माना जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के कानपुर में स्थित एक शिव मंदिर ऐसा है, जहां आज भी अश्वत्थामा के आने के प्रमाण मिलने की मान्यता है।
कानपुर से लगभग 40 किलोमीटर दूर शिवराजपुर क्षेत्र में स्थित विश्व प्रसिद्ध खेरेश्वर महादेव मंदिर आस्था और रहस्य का अनोखा संगम है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और मान्यता है कि इसका निर्माण महाभारत काल में हुआ था। रोज़ रात आरती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, लेकिन सुबह जब द्वार खोले जाते हैं तो शिवलिंग पर ताज़ी पूजा-अर्चना के स्पष्ट चिन्ह मिलते हैं फूल, जल और भस्म।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, प्रतिदिन भोर में सबसे पहले अश्वत्थामा स्वयं यहां आकर अपने आराध्य महादेव की पूजा करते हैं। अश्वत्थामा को भगवान शिव का परम भक्त माना जाता है, इसलिए यह विश्वास और भी गहरा हो जाता है।
मंदिर के पुजारियों का कहना है कि इस रहस्य को जानने के लिए कई बार जांच टीमें आईं। मंदिर परिसर में कैमरे लगाए गए, लेकिन रात के बाद या तो कैमरे अपने आप बंद हो गए या फिर किसी भी तरह की रिकॉर्डिंग नहीं मिल सकी। यह रहस्य आज भी वैसा ही बना हुआ है।
महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। दूर-दूर से भक्त खेरेश्वर महादेव के दर्शन करने आते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।
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महाभारत कथा के अनुसार, अश्वत्थामा के लिए चिरंजीवी होना किसी वरदान से कम नहीं बल्कि एक भयानक अभिशाप है। महाभारत युद्ध में उन्होंने कौरवों का साथ दिया। युद्ध के बाद क्रोध में आकर उन्होंने पांडवों का वध करने का प्रयास किया, लेकिन भगवान कृष्ण की लीला से पांडव बच गए। इसके स्थान पर द्रौपदी के पुत्र मारे गए।
इस पाप से क्रोधित होकर भगवान कृष्ण ने भीम को आदेश दिया कि अश्वत्थामा की दिव्य मणि उसके मस्तक से निकाल ली जाए और उसे रोगी शरीर के साथ धरती पर भटकने का श्राप दिया जाए। तभी से कहा जाता है कि अश्वत्थामा आज भी धरती पर जीवित हैं और अपने आराध्य शिव की शरण में आते रहते हैं।