मत्स्य अवतार जयंती 2026: कब है, क्यों लिया भगवान विष्णु ने मछली का रूप? जानें रहस्य, महत्व और पूरी कथा!
Lord Vishnu: मत्स्य अवतार जयंती 2026 का पर्व भगवान विष्णु के प्रथम अवतार की याद में मनाया जाता है। इस दिन भक्त उनके मत्स्य रूप की पूजा कर जीवन में सुख, समृद्धि और संकटों से रक्षा की कामना करते हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान विष्णु ने मछली का रूप(सौ. AI)
Matsya Avatar Jayanti Kab Hai: हर साल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मत्स्य जयंती मनाई जाती है। साल 2026 में मत्स्य जयंती का पावन पर्व 21 मार्च, शनिवार के दिन पड़ रही है। शास्त्रों के अनुसार, चैत्र में शुक्ल पक्ष की तृतीया को भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार हुआ था। इस अवतार की कथा मत्स्य पुराण में मिलती है।
पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु ने सृष्टि को प्रलय से बचाने के लिए मत्स्यावतार लिया था। मत्स्य अर्थात मछली। कहते हैं इस अवतार में उन्होंने वैवस्वत मनु को एक विशाल नाव बनाकर उसमें सभी पशु, पक्षी, नर नारी, ऋषि मुनियों को रखने का आदेश दिया था ताकि जल प्रलय के समय अधिकतर प्रजातियां बची रहें।
मत्स्य जयंती 2026 कब है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, मत्स्य जयंती चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। इस साल यह 21 मार्च 2026 को पड़ रही है। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा और हवन करते हैं और मत्स्य अवतार से जुड़ी कथाएं सुनते हैं। यह दिन हमें यह भी याद दिलाता है कि संकट में धर्म और ज्ञान की रक्षा करना कितना महत्वपूर्ण है।
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मत्स्य जयंती महत्व
हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, हयग्रीव नामक राक्षस से पृथ्वी की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने विशालकाय मत्स्य (मछली) का अवतार लिया था। मछली का रूप धारण कर भगवान ने दैत्य पुत्र से पुन: वेदों को प्राप्त किया था।
इसलिए इस दिन व्रत रखा जाता है और भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान, पूजा और व्रत से तन और मन की शुद्धि होती है और कष्ट दूर हो जाते हैं।
मत्स्य जयंती पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठें।
- घर में सफाई कर के गंगाजल छिड़काव करें।
- इसके बाद भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित कर के उनके सामने व्रत और पूजा का संकल्प लें।
- फिर वेदोक्त मंत्रों से मत्स्य रूप में भगवान विष्णुजी का पूजन करें।
- पूजा करने के बाद ब्राह्मण भोजन करवाएं और श्रद्धा अनुसार दान करें।
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मत्स्य अवतार की पौराणिक कथा
कल्पांत के पूर्व एक बार ब्रह्मा जी के पास से वेदों को एक बहुत बड़े दैत्य ने छल से चुरा लिया। तब चारों ओर अज्ञानता का अंधकार फैल गया और पाप तथा अधर्म का बोलबाला होता चला गया। तब भगवान विष्णु ने धर्म की रक्षा के लिए मत्स्य का रूप धारण कर उस दैत्य का वध किया और वेदों की रक्षा की।
