

Mata Parvati And Bel Tree: सावन का पवित्र महीना अब अंतिम चरण में है। सावन पूर्णिमा के दिन यह पवित्र महीना समाप्त हो जाएगा। सावन महीने के हर दिन भगवान भोलेनाथ के दर्शन करना और उनका जलाभिषेक करने का खास महत्व होता है। सावन में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा में इस्तेमाल होने वाली हर तरह सामग्री से उनकी आराधना होती है।
इसमें सबसे प्रमुख होता है बेलपत्र जो भोले भंडारी को बहुत ही प्रिय होता है। शिवपुराण में बेलपत्र की महिमा के बारे में वर्णन मिलता है। आइए जानते है बेलपत्र की उत्पत्ति कैसे हुई, इसके प्रकार , और उसकी पूजा करने से लाभ
जब बात बेलपत्र की उत्पत्ति की आती है तब शिव महापुराण की एक कथा सामने आती है। शिवपुराण में वर्णन मिलता है कि एक बार देवी पार्वती तपस्या में लीन थीं। तपस्या के दौरान उनके पसीने की कुछ बूँदें धरती पर गिरीं। उन्हीं बूँदों से बेल वृक्ष की उत्पत्ति हुई।
चूंकि बेल वृक्ष की उत्पत्ति माता पार्वती के पसीने से हुई मानी जाती है, इसी कारण कहा जाता है कि इसमें माता पार्वती के अनेक दिव्य स्वरूपों का वास है। मान्यता है कि बेल वृक्ष की जड़ों में माता गिरिजा, तने में माहेश्वरी, शाखाओं में दक्षिणायनी और पत्तियों में स्वयं पार्वती देवी का स्वरूप निवास करता है।
वहीं इसके फलों में कात्यायनी और फूलों में माता गौरी का रूप माना गया है। इतना ही नहीं, इस संपूर्ण वृक्ष में मां लक्ष्मी की कृपा भी मानी जाती है।
हिंदू परंपराओं के अनुसार, भगवान शिव को बेलपत्र सबसे प्रिय है। भक्त इसे सच्ची भक्ति,विनम्रता,कृतज्ञता,समर्पण के साथ शिवलिंग पर चढ़ाते हैं इससे पूजा का पूर्ण फल मिलता है।
सच्चे मन और अटूट विश्वास के साथ बेल पत्र शिवलिंग पर अर्पित करने से शिवजी का पूर्ण आशीर्वाद मिलता है और जीवन की सभी नकारात्मक शक्तियों से बाहर निकलने की शक्ति मिलती है।
बेलपत्र को इतनी शुभ सामग्री माना जाता है कि सावन के पूरे महीने में इसे शिवलिंग पर जो भक्त इसे अर्पित करते हैं उनके जीवन में सदैव समृद्धि बनी रहती है और शिवजी का आशीर्वाद भी मिलता है।
सनातन धर्म बेल पत्र से लेकर बेल वृक्ष का बड़ा महत्व है। ऐसा कहा जाता है कि, बिल्व वृक्ष के आसपास सांप नहीं आते।अगर किसी की शवयात्रा बिल्व वृक्ष की छाया से होकर गुजरे तो उसका मोक्ष हो जाता है।
इसके अलावा, वायुमंडल में व्याप्त अशुद्धियों को सोखने की क्षमता सबसे ज्यादा बिल्व वृक्ष में होती है। 4, 5, 6 या 7 पत्तों वाले बिल्व पत्रक पाने वाला परम भाग्यशाली और शिव को अर्पण करने से अनंत गुना फल मिलता है।