Mahesh Navami 2026 : महेश नवमी पर करें भगवान शिव के ‘महेश’ स्वरूप की पूजा, जानें व्रत विधि और महत्व
Mahesh Navami 2026 Rituals:हिंदू धर्म में महेश नवमी का महत्व बड़ा महत्व हैं। खासतौर से महेश्वरी समाज के लिए है। इस दिन व्रत रखने और विशेष आराधना करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान शिव ( सौ.जैमिनी)
Mahesh Navami Significance : हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि विशेष महत्व रखता है। इस दिन महेश नवमी मनाया जाता है। इस साल महेश नवमी का पावन पर्व 23 जून 2026 को मनाया जा रहा है। धर्म ग्रथों में यह दिन भगवान शिव के ‘महेश’ रूप को समर्पित है।
विशेष रूप से माहेश्वरी समाज के लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन भगवान शिव के भक्तों के लिए भी यह दिन साधना, पूजा और प्रगति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।मान्यता है कि इस दिन भगवान महेश की विधिपूर्वक पूजा करने से व्यापार में उन्नति, परिवार में सुख-शांति और जीवन में इच्छित लक्ष्यों की प्राप्ति होती है।
महेश नवमी का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 2026 ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की शुरुआत 22 जून 2026, सोमवार को दोपहर 03 बजकर 39 मिनट पर हो रही है। इस तिथि का समापन अगले दिन 23 जून 2026, मंगलवार की शाम को 04 बजकर 39 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, महेश नवमी का पावन पर्व 23 जून 2026 को मनाया जाएगा।
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महेश नवमी पूजा विधि
- महेश नवमी के दिन प्रातः काल स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें ।
- पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- एक चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मूर्तियाँ स्थापित करें।
- सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें, फिर शिवजी को गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा आदि अर्पित करें।
- माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें ।
- फिर एकाग्र चित्त होकर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।
- इसके बाद महेश नवमी व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।
- भगवान को खीर या मौसमी फलों का भोग लगाएं।
- यदि संभव हो तो इस दिन रुद्राभिषेक अवश्य करें, यह विशेष फलदायी होता जाता है।
- अंत में शिव-पार्वती की आरती करें और उपस्थित लोगों में प्रसाद वितरित करें।
महेश नवमी का महत्व
हिंदू धर्म में महेश नवमी का महत्व बड़ा महत्व हैं। खासतौर से महेश्वरी समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन महेश्वरी समाज की उत्पत्ति हुई थी। इस दिन भगवान शिव की पूजा महेश नाम से की जाती है। इसे शिव-गौरी विवाह तिथि भी कहते हैं। इस दिन दंपत्ति शिव-पार्वती का पूजन करने खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना करते हैं।
