असम का महापर्व माघ बिहू (सौ.सोशल मीडिया)
Assam Festival: माघ बिहू असम के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे हर साल मकर संक्रांति के एक दिन बाद मनाया जाता है। अगर मकर संक्रांति 14 जनवरी को है, तो माघ बिहू 15 जनवरी को मनाया जाएगा। इसे रोहिनि बिहू भी कहा जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से नए साल की शुरुआत और फसल कटाई का उत्सव है और असम में इसे परिवार और समुदाय के साथ मिलकर धूमधाम से मनाया जाता है। आइए जानते है माघ बिहू से जुड़ी रोचक बातें
असम का महापर्व माघ बिहू असम के लोगों के लिए नए साल की शुरुआत और फसल कटाई का उत्सव मनाते है।
किसानों के लिए यह दिन मेहनत की हुई फसल की खुशी और आभार व्यक्त करने का अवसर होता है।
सामाजिक दृष्टि से यह परिवार और समुदाय को जोड़ने वाला पर्व है।
घरों में ताजे पकवान बनाए जाते हैं, जैसे पितो (चावल की रोटियाँ), तिल-गुड़ की मिठाइयाँ और माछ-बहुती (मछली और सब्ज़ियाँ)।
असम के पारंपरिक बोरा और बाहा नृत्य और गीत गाए जाते हैं।
घर की सफाई और पूजा स्थल की सजावट इस दिन अनिवार्य मानी जाती है।
लोग पड़ोसियों और रिश्तेदारों के घर जाकर मिठाइयाँ बांटते हैं और शुभकामनाएँ देते हैं।
आधुनिक समय में पर्व को ऑनलाइन साझा करना और वीडियो कॉल से दूर परिवार के साथ उत्सव मनाना आम हो गया है।
सोशल मीडिया पर पारंपरिक व्यंजन और नृत्य की झलकियाँ साझा की जाती हैं।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लोग रेसिपी और पारंपरिक कला सीखने में भी रुचि दिखा रहे हैं।
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माघ बिहू केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि यह असम की सांस्कृतिक धरोहर और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। इससे किसानों की मेहनत की सराहना होती है और समाज में भाईचारे और सांस्कृतिक चेतना बढ़ती है।