

Why Lord Vishnu Seat In Sheshnag: अक्सर हम भगवान विष्णु को शेषनाग पर शयन करते हुए देखते हैं, लेकिन बहुत कम लोग इसके पीछे छिपे गहरे अर्थ को समझ पाते हैं। यह दृश्य केवल धार्मिक चित्रण नहीं, बल्कि ब्रह्मांड, समय और संतुलन का एक गहरा प्रतीक है, जो जीवन को समझने का संदेश देता है।
शेषनाग को अनंत कहा जाता है, यानी जिसका कोई अंत नहीं होता। वे अनंत काल, अनंत शक्ति और सृष्टि की निरंतरता का प्रतीक हैं। भगवान विष्णु, जो सृष्टि के पालनकर्ता हैं, उनका शेषनाग पर विराजमान होना यह दर्शाता है कि पूरी सृष्टि अनंत समय और शक्ति के आधार पर टिकी हुई है।
शेषनाग अत्यंत शक्तिशाली और विषैले माने जाते हैं, फिर भी भगवान विष्णु उनके ऊपर शांत मुद्रा में विश्राम करते हैं। इसका अर्थ है कि ईश्वर सबसे उग्र और अशांत शक्तियों को भी अपने नियंत्रण में रखते हैं। यह हमें जीवन में धैर्य, संतुलन और आत्मसंयम बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
पुराणों के अनुसार, भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शैया पर विश्राम करते हैं। यह क्षीरसागर ब्रह्मांडीय चेतना और पवित्रता का प्रतीक है, जबकि शेषनाग उस चेतना का आधार हैं। यह दृश्य बताता है कि सृष्टि एक दिव्य संतुलन और ऊर्जा पर टिकी है।
शेषनाग को भगवान विष्णु का सबसे बड़ा भक्त और सेवक माना जाता है। वे हर युग में भगवान की सेवा करते हैं। मान्यता है कि लक्ष्मण और बलराम, शेषनाग के ही अवतार थे, जिन्होंने अलग-अलग युगों में भगवान की सेवा की।
शेष का अर्थ है जो अंत में भी बचा रहे। प्रलय के बाद जब सब कुछ समाप्त हो जाता है, तब भी शेषनाग और भगवान विष्णु का अस्तित्व बना रहता है। यह सनातन सत्य और अनंत अस्तित्व का प्रतीक है, जो कभी समाप्त नहीं होता।
भगवान विष्णु का शेषनाग पर विराजमान होना हमें यह सिखाता है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न हों, संतुलन और धैर्य बनाए रखना जरूरी है। यह चित्र हमें याद दिलाता है कि हर स्थिति में स्थिर रहकर ही हम जीवन को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।