Lord Kartikeya: स्कंद षष्ठी व्रत की महिमा जानकर हो जाएंगे हैरान! कुंडली के मंगलदोष से भी मिलेगी राहत
Lord Kartikeya Worship: स्कंद षष्ठी व्रत भगवान कार्तिकेय को समर्पित एक अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। जानें स्कंद षष्ठी व्रत की महिमा, पूजा विधि और इसके धार्मिक लाभ।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान कार्तिकेय (सौ.AI)
Skanda Shashthi For Mangal Dosh: भगवान कार्तिकेय को समर्पित स्कंद षष्ठी का व्रत हर महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को रखा जाता है। इस बार आषाढ़ महीने में पड़ने वाली स्कंद षष्ठी का व्रत 19 जुलाई 2026 रविवार के दिन रखा जाएगा। धार्मिक ग्रथों में स्कंद षष्ठी व्रत की महिमा का वर्णन किया गया है। बताया गया है कि,इस दिन व्रत रखकर विधि-विधान से भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से साहस, विजय, और संतान की प्राप्ति होती है। यह व्रत शत्रुओं पर विजय पाने और कुंडली में मंगल दोष के निवारण के लिए बेहद उत्तम माना जाता है।
स्कंद षष्ठी 2026 का शुभ मुहूर्त
षष्ठी तिथि प्रारंभ: 18 जुलाई 2026, शनिवार रात 8:40 बजे से षष्ठी तिथि समाप्त: 19 जुलाई 2026, रविवार रात 10:15 बजे तक उदयातिथि के अनुसार 19 जुलाई को स्कंद षष्ठी का व्रत और पूजा करना शुभ रहेगा।
स्कंद षष्ठी व्रत का क्या धार्मिक महत्व
स्कंद षष्ठी का व्रत भगवान कार्तिकेय की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कार्तिकेय देवताओं के सेनापति हैं और वे साहस, पराक्रम, बुद्धि तथा विजय के प्रतीक हैं।
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इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और मनोकामनाएं पूरी होने का आशीर्वाद मिलता है।
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कैसे करें भगवान कार्तिकेय की पूजा?
- इस व्रत की पूजा बहुत ही सरल है। बस इन आसान बातों का ध्यान रखें:
- व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर नहा लें और साफ सुथरे कपड़े पहन लें।
- घर के मंदिर या पूजा वाली जगह की अच्छे से सफाई करें।
- एक लकड़ी की चौकी पर भगवान कार्तिकेय और पूरे शिव परिवार (शिव जी, माता पार्वती और गणेश जी) की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
- सच्चे मन से उन्हें फूल, फल और धूप-दीप (अगरबत्ती और दीया) अर्पित करें।
- पूजा के दौरान भगवान कार्तिकेय के मंत्रों का जाप करें और ‘स्कंद षष्ठी व्रत कथा’ जरूर पढ़ें या सुनें।
- आखिर में भगवान को भोग लगाकर आरती करें और पूरे परिवार को प्रसाद बांटें।
