चैत्र पूर्णिमा(सौ.सोशल मीडिया)
Chaitra Purnima Deepak Upay: इस वर्ष चैत्र पूर्णिमा 02 अप्रैल को रखा जा रहा हैं। धर्म शास्त्रों में पूर्णिमा तिथि का बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व माना गया है क्योंकि इस दिन मन का कारक माने जाने वाला चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्त यानि पूर्ण आकार लिए रहता है।
ऐसे में इस पावन तिथि पर न सिर्फ चंद्र देवता बल्कि भगवान विष्णु के साथ हनुमान जी की पूजा-अर्चना अत्यंत ही शुभ और फलदायी मानी गई है क्योंकि उत्तर भारत की मान्यता के अनुसार इसी दिन बजरंगी का जन्म हुआ था।
ज्योतिष एवं वास्तु शास्त्र के अनुसार, हिंदू धर्म में पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करना अनंत पुण्यकारी माना गया है। ऐसे में चैत्र पूर्णिमा पर गंगा स्नान जरूर करें। यदि ऐसा करना आपके लिए संभव न हो तो, आप घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं। स्नान के बाद अपने सामर्थ्य के अनुसार, गरीबों व जरुरमंद लोगों को अन्न व धन का दान करें।
बताया जाता है कि, गृह क्लेश और आर्थिक तंगी से मुक्ति के लिए आप चैत्र पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करके भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधि-विधान पूर्वक पूजा-अर्चना करें। पूजा में विष्णु जी को सफेद चंदन का तिलक लगाएं। साथ ही घर के मुख्य द्वार पर सफेद चंदन से स्वस्तिक बनाएं। इस उपाय को करने से घर में सुख-शांति आती है।
चैत्र पूर्णिमा के प्रदोष काल में विधि-विधान से मां लक्ष्मी की पूजा करें और उत्तर-पूर्व दिशा में दीपक जलाएं। इसके अलावा, मां लक्ष्मी के सामने दीपक जलाएं और वहीं बैठकर श्रीसूक्त का पाठ करें।
धर्म शास्त्रों के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा की रात को कच्चे दूध, चीनी और चावल को मिलाकर चंद्र देव को अर्घ्य दें।
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1. मूल मंत्र – ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः
2. धन प्राप्ति मंत्र – ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः
3. महा लक्ष्मी मंत्र – ॐ महालक्ष्म्यै नमः
4. प्रसिद्ध स्तुति मंत्र – या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
5. लक्ष्मी कुबेर मंत्र – ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥