केवल देवियां ही नहीं शक्ति की अनंत धारा हैं 64 योगिनियां, जानिए इनके मंदिरों से जुड़ा रहस्य
importance of 64 Yoginis: 64 योगिनियों की बात की जाए तो, यह प्रतीक है कि योगिनियां अनंत और आकाश जैसी विराट ऊर्जा की प्रतीक हैं। इन योगिनियों की पूजा गुप्त तरीके से की जाती है।
- Written By: दीपिका पाल
64 योगिनी का महत्व (सौ. सोशल मीडिया)
Significance of Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि का दौर चल रहा है जिसमें माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा हर दिन विधान के साथ की जाती है। मातारानी की पूजा भक्ति पूर्वक करने से श्रद्धालुओं के जीवन की परेशानियों का हल होता है। आपने 64 योगिनी मंदिरों के बारे में सुना होगा या देखा होगा, यह माता के रूप या देवियां नहीं बल्कि देवी शक्ति की अनंत धारा होता है।
माता के हर रूप या भाव कभी रौद्र, कभी सौम्य, तो कभी रहस्यमयी में कुछ ना कुछ अर्थ छिपा होता है। यहां पर 64 योगिनी शक्तियों की उत्पत्ति कैसे हुई इसके बारे में बताया गया है।
सम्बंधित ख़बरें
क्या है जवारे विसर्जन की सही विधि? जानिए क्या हैं इसके नियम और मंत्र
चैत्र नवरात्रि के समापन के बाद ये काम करना बिल्कुल न भूलें, तभी पूर्ण होगी पूजा
महानवमी पर जानिए सभी अष्टसिद्धियों के नाम, और जानिए किसकी पुत्री से हनुमानजी को करना पड़ा था विवाह
आज चैत्र नवरात्र के अंतिम दिन जरूर पढ़ें मां सिद्धिदात्री की यह कथा, फलित होगी आपकी पूजा
पहले जानिए कौन है 64 योगिनियां
यहां पर शास्त्रों और देवी माता के ग्रंथों में 64 योगिनियों के बारे में उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, जब महाशक्ति ने ब्रह्मांड की रचना की, तब उन्होंने अपने अंगों से 64 दिव्य शक्तियों को उत्पन्न किया। इन दिव्य शक्तियों को 64 योगिनियां कहते है। ये न केवल साधना में सहायक मानी गईं, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा के नियंत्रण और रहस्यमयी शक्तियों की अधिष्ठात्री भी बनीं. कहा जाता है कि इनकी पूजा करने वाला साधक भय से मुक्त होकर अद्भुत सिद्धियां प्राप्त कर सकता है। यहां पर 64 योगिनियों की बात की जाए तो, यह प्रतीक है कि योगिनियां अनंत और आकाश जैसी विराट ऊर्जा की प्रतीक हैं।कहा जाता है कि इन मंदिरों में साधना करने से साधक सीधे ब्रह्मांडीय शक्ति से जुड़ सकता है।
जानें 64 योगिनियों के नाम
शास्त्रों में 64 योगिनियों के नाम अलग-अलग परंपराओं में थोड़ा भिन्न मिलते हैं, लेकिन योगिनी तंत्र और शक्तिसंगम तंत्र में वर्णित प्रमुख सूची इस प्रकार है-
- अंभा
- धूमावती
- नित्या
- गणेश्वरी
- गन्धार्विका
- वेतालिका
- लक्ष्मी
- रुद्राणी
- वज्रेश्वरी
- यमघण्टा
- इन्द्राणी
- यक्षिणी
- व्याघ्रचर्माम्बरा
- कालिका
- चण्डिका
- महेश्वरी
- शाण्डकाली
- वाराही
- नटेश्वरी
- कौमारी
- चामुण्डा
- कौशिकी
- भैरवी
- कार्त्तिकी
- ब्रह्माणी
- वैष्णवी
- क्षेमङ्करी
- रौद्री
- नाराय़णी
- ऐन्द्री
- कौशल्येश्वरी
- कपालिनी
- भद्रा
- विंध्यवासिनी
- कात्यायनी
- कोटवी
- तारा
- शाकम्भरी
- कालरात्रि
- भद्रकाली
- मातंगी
- कामेश्वरी
- अष्टलक्ष्मी
- अष्टमातृका
- षोडशी
- वज्रवाहिनी
- गजमुखी
- बगलामुखी
- अन्नपूर्णा
- छिन्नमस्ता
- उग्रतारा
- भीमेश्वरी
- महालक्ष्मी
- काली
- भुवनेश्वरी
- राजमाता
- शूलिनी
- दुर्गा
- चन्द्रघण्टा
- सिद्धलक्ष्मी
- विन्ध्येश्वरी
- महाकाली
- त्रिपुरसुन्दरी
- कामाख्या
इन योगिनियों की महिमा इतनी गुप्त और शक्तिशाली है कि इनके मंदिर भी साधारण नहीं हैं. अधिकतर 64 योगिनी मंदिर गोलाकार या अर्धगोलाकार बनाए गए हैं, जिनमें खुला आकाश दिखाई देता है वहीं पर पूजा भी शांत तरीके से की जाती है।
