पितृ पक्ष में भोजन के नियम (सौ.सोशल मीडिया)
हिंदू धर्म में व्रत-त्योहारों का महत्व होता है जिसमें हर एक व्रत किसी ना किसी भगवान या आस्था को समर्पित माना जाता है। जल्द ही पितृ पक्ष की शुरुआत होने वाली है इस दौरान पितरों को याद करने और भूल-चूक को माफ करने के लिए अनुष्ठान किए जाते है। मान्यता के अनुसार हिंदू धर्म में पूर्वजों या पितरों का स्थान विशेष रखा गया है। कहते है पितृ पक्ष के दौरान ही पितर धरती पर आते है और अपने वंशजों की पूजा और भोजन को स्वीकारते है इस दौरान प्रसन्न होकर आशीर्वाद भी देते है।
कहा जाता है पितृ पक्ष में अगर पितरों को उनकी पसंद का खाना भोग में दिया जाता है तो वे प्रसन्न होते है। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें कि आपको पितृ पक्ष के दौरान पितरों का भोजन बनाने और उसे ग्रहण करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य द्विवेदी के अनुसार मानें तो, पितृ पक्ष में 16 दिनों का विशेष महत्व माना जाता है कहते है इस दौरान आप मुख्य रूप से आप अपने पूर्वजों के लिए भोजन बनाते है और पूजा में ग्रहण कराते है तो इसका शुभ फल मिलता है। ऐसे समझें तो, इस अवधि के दौरान पूर्वज हमारे माध्यम से ही जल और भोजन ग्रहण करते हैं और उनकी आत्मा को तृप्ति मिलती है। इतना ही नहीं आपके पूर्वज अपनी पसंद का भोजन करके वप प्रसन्न हो जाते हैं और घर में किसी भी पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। यही नहीं श्रद्धा भाव से बनाया और परोसा गया भोजन पितरों को प्रसन्न करने में मदद करता है।
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यहां पर पूर्वजों को भोजन कराने का विशेष महत्व होता है यानि पितरों को भोजन कराना सम्मान का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान नियम के अनुसार, भोजन पकाना और पितरों को तर्पण करना केवल एक अनुष्ठान नहीं बल्कि एक पवित्र कर्तव्य भी है। पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों का आशीर्वाद पाने और वंशजों द्वारा की गई गलती की माफी मांगने के लिए इस दिन पूजा का महत्व मानते है। पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों को अर्पित किए गए भोजन से दिवंगत आत्माओं को शांति मिलती है, जिससे उन्हें मुक्ति या मोक्ष प्राप्त होता है। इस दौरान के नियम काफी अलग होते है जिनका पालन करना चाहिए। कहते है कि, यदि पूर्वजों को सही तरीके से भोजन नहीं अर्पित किया जाता है तो वो रुष्ट हो सकते हैं और इसका परिणाम आपके जीवन में पितृ दोष के रूप में दिखाई दे सकता है।
कहते है पितृ पक्ष की पूजा में जिन बातों का ख्याल रखना चाहिए उतना ही पितरों के लिए भोजन बनाते समय ध्यान देना जरूरी है।
1- सबसे जरूरी है भोजन बनाने से पहले साफ-सफाई और शुद्धता का होना। पितरों के लिए जो भी महिलाएं भोजन बना रही है उसे सबसे पहले नहाकर शुद्ध होना चाहिए और वस्त्र भी शुद्ध हो तो ज्यादा अच्छा है।
2- भोजन, जिस बर्तन में बना रहे है उसे साफ करना चाहिए आपके तन के साथ मन की शुद्धता भी जरूरी होती है।
3- पुर्वजों को आप तामसिक नहीं सात्विक चीजों का ही भोग लगाएं तो अच्छा रहेगा।
4- पितृ पक्ष के दौरान खास भोग में आप खीर, पूड़ी और हलवा आदि को शामिल करें तो अच्छा रहेगा। कहते हैं इन पकवानों को अर्पित करने से पितरों को आत्मिक शांति मिलती है।
5- भोजन में बनाने से पहले सामग्रियों का शुद्ध होना जरूरी है इसके लिए ताजी चीजों का ही इस्तेमाल करें तो ज्यादा अच्छा है।