प्रथम पूज्य भगवान गणेश (सौ.फाइल फोटो)
देशभर में 10 दिवसीय गणेशोत्सव का महापर्व चल रहा रहा है। 7 सितंबर को गणेश चतुर्थी के दिन से शुरू हुए इस महापर्व का समापन 19 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ हो जाएगा। भगवान गणेश हिंदू धर्म के सबसे लोकप्रिय देवों में से एक हैं। गणेश चतुर्थी के मौके पर देशभर में भगवान गणेश की पूजा होती है और खासतौर पर उनके जन्म के रूप में इस त्योहार को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य के आरंभ से पहले गणपति जी की पूजा की जाती है। शादी-विवाह हो या मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश हों या माता की चौकी सभी शुभ कार्यों से पहले गणेशजी को पूजा जाता है। आइए जानें किसी कार्य की शुरुआत से पहले क्यों की जाती है भगवान गणेश की पूजा।
आपको बता दें, गणेश चतुर्थी ही नहीं भगवान गजानन की पूजा अन्य त्योहारों पर भी सबसे पहले की जाती है। दरअसल इसके पीछे एक मान्यता है कि बप्पा हर प्रकार के विघ्न बाधा को हर लेते हें। उनकी पूजा करने से कोई भी कार्य बिना बाधा के पूर्ण होता है। जो भी कार्य आप करते हैं जो बिना रुकावट के अपने मुकाम को पहुंचता है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी है।
एक बार देवताओं के बीच में इस बात को लेकर विवाद हो गया कि धरती पर किसकी पूजा सबसे पहले की जाएगी। सभी देवतागण खुद को सबसे श्रेष्ठ बनाने लगे। तब नारदजी ने इस स्थिति को देखते हुए शिवजी की शरण में जाने की सलाह दी।
जब सभी देवता शिवजी के पास पहुंचे तो उन्होंने सभी के बीच के विवाद को सुलझाने के लिए एक प्रतियोगिता का आयोजन रखा। उन्होंने सभी देवताओं से अपने-अपने वाहन पर बैठकर संपूर्ण ब्रह्मांड का चक्कर लगाने को कहा। जो भी परिक्रमा करके सबसे पहले उनके पास पहुंचेगा, धरती पर उसकी ही पूजा की जाएगी।
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सभी देवताअपने-अपने वाहन पर सवार होकर ब्रह्मांड का चक्कर लगाने निकल पड़े। मगर गणेशजी अपने वाहन मूषक पर सवार नहीं हुए। वह ब्रह्मांड का चक्कर लगाने की बजाए अपने माता-पिता के चारों ओर परिक्रमा करने लगे। उन्होंने माता-पिता के चारों ओर 7 बार परिक्रमा की और हाथ जोड़कर खड़े हो गए।
जब सभी देवता ब्रह्मांड का चक्कर लगाकर लौटे तो गणेशजी को वहीं पर खड़ा पाया। अब शिवजी प्रतियोगिता के विजेता को घोषित करने चल दिए। उन्होंने गणेशजी को विजयी घोषित किया। सभी देवता आश्चर्य में पड़ गए कि सभी देवता पूरे ब्रह्मांड का चक्कर लगाकर आए हैं उन्हें छोड़कर गणेशजी को क्यों विजेता घोषित किया गया।
तब शिवजी ने बताया कि पूरे ब्रह्मांड में माता-पिता का स्थान सर्वोपरि है और गणेशजी ने अपने माता-पिता की परिक्रमा की है, इसलिए वह सभी देवताओं में सबसे पहले पूजनीय हैं। तभी से गणेशजी की पूजा सबसे पहले होने लगी। सभी देवताओं ने शिवजी के इस निर्णय को स्वीकार किया।