चरण स्पर्श करने के महत्व (सोशल मीडिया)
सनातन धर्म में पैर छूने की परंपरा प्राचीन काल से ही चलती आ रही है। इस परंपरा का पालन आज भी काफी लोग करते हैं। कहते हैं, चरण स्पर्श करने से धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों तरह के लाभ मिलते हैं। भक्ति और समर्पण की भावना से लोग चरणों को स्पर्श करके आशीर्वाद लेते हैं। सनातन धर्म में पैर छूने का इतना महत्व है कि हमारे यहां मां और गुरु के चरण स्पर्श को उनके प्रति आस्था और श्रद्धा का प्रतीक माना गया है।
पैर छूने की प्रक्रिया जितनी आस्था और विश्वास से जुड़ी हुई है, उतनी ही हिंदू धर्म के मान्यताओं से भी जुड़ी हुई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ ऐसे लोग हैं, जिनके अगर आप पैर छूते हैं तो पुण्य की जगह पाप के भागीदारी बनते है। ऐसे में आइए जानें क्या कहते हैं ज्योतिष-
1- ज्योतिषियों के मुताबिक, किसी भी पिता को अपनी बेटी, भतीजी, नातिन या पोती से पैर नहीं छुआने चाहिएं। वे सब देवियों का बाल रूप होती हैं, जो कि भारतीय संस्कृति में पूजनीय कही गई हैं। ऐसे में अगर आप उन्हें अपने चरण स्पर्श करने की अनुमति देते हैं तो आप पाप के भागी बन जाते हैं।
2-यदि आप मंदिर में हैं और आपको वहां पर कोई बड़ा-बुजुर्ग या सम्मानीय व्यक्ति मिल जाता है, तो आप पहले भगवान को प्रणाम करें। क्योंकि, मंदिर में भगवान से बड़ा कोई नहीं होता है। भगवान के सामने किसी के पैर छूना मंदिर और भगवान का अपमान माना जाता है। इसलिए ऐसी गलती न करें।
3-आज के समय में देखा जाता है कि मामा और भांजे भांजी एक दोस्त की तरह भी रहते हैं, लेकिन मिलते से ही उनके समान में पैर जरूर छूते हैं। शास्त्रों के अनुसार भांजा-भांजी को अपने मामा- मामी के पैर नहीं छूने चाहिए। शास्त्रों में भांजा-भांजी को पूजनीय माना गया है और अगर ये पैर छूते हैं तो इससे मामा- मामी को पाप लग सकता है।
4-कहते हैं, यदि कोई व्यक्ति सो रहा है या लेटा हुआ है, तो उस समय उसके पैर नहीं छूना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इससे लेटे हुए व्यक्ति की उम्र घटती है। केवल मरे हुए व्यक्ति के ही पैर लेटे हुई अवस्था में छुए जाते हैं।
5-हिंदू धर्म में यह माना जाता है कि श्मशान घाट से आए हुए व्यक्ति को किसी को भी अपना पैर नहीं छूने देना चाहिए। भले ही पैर छूने वाला इंसान आपसे बहुत छोटा हो या आपसे नीचे पद पर काम करता हो। ऐसा करने से खुद का नुकसान होता है। शास्त्रों में भी अंतिम संस्कार से लौटने पर व्यक्ति के पैर छूना अशुभ माना जाता है। शमशान में सब एक समान होते हैं। लेखिका-सीमा कुमारी