दीपावली के 5 दिनों का महत्व (सौ.सोशल मीडिया)
Diwali 2024: दिवाली का त्योहार देश के सबसे बड़े त्योहार में से एक होता हैं जो धनतेरस से लेकर भाईदूज तक पांच दिनों के लिए मनाया जाता है। इन पांच दिनों के तरह का अलग महत्व होता है तो अलग-अलग मान्यताएं और परंपराएं प्रचलित है। दीपावली के इन 5 दिनों में घर और आंगन में दीयें जलाकर त्योहार मनाया जाता है तो इसके अलावा इस त्योहार के दिन रंगोली, पकवान भी बनाए जाते है। ऐसे में चलिए जानते हैं दीवाली के पांच दिनों का महत्व।
धनतेरस (धन त्रयोदशी)
दीपावली के पांच दिनों में से पहला दिन धनतेरस को समर्पित होता हैं इस दिन को घर में खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस खास दिन धन की देवी लक्ष्मी और स्वास्थ्य के देवता धन्वंतरि की पूजा करते हैं औऱ लोग सोने, चांदी, बर्तन या अन्य कीमती वस्तुएं खरीदते हैं। इस धनतेरस त्योहार के पीछे कहानी मिलती हैं कि, भगवान धन्वंतरि इसी दिन अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए इस दिन को मनाते है।
2-नरक चतुर्दशी (काली चौदस/छोटी दीपावली)
दीपावली का दूसरा दिन नरक चतुर्दशी को समर्पित होता है इसे कई मायनों में इसे छोटी दीपावली भी कहते हैं इसका कारण है कि, यह बड़ी दीवाली से एक दिन पहले मनाई जाती है। नरक चौदस का दिन बेहद खास होता है नरकासुर के वध के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें मुक्त कराया इस दिन लोग सूर्योदय से पहले स्नान करते हैं और इसे नरक स्नान कहा जाता है। कहा जाता हैं कि, पापों से मुक्ति मिलती है. इस दिन दीप जलाने की भी परंपरा होती है, जो कि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।
3- मुख्य दीपावली
दीपावली के तीसरे दिन बड़ी दीपावली या फिर लक्ष्मी पूजन करने का महत्व होता हैं यानि इस दिन धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी की पूजा के लिए खास माना जाता है। दीपावली की रात घरों में दीप जलाए जाते हैं और लोग अपने घरों को साफ-सुथरा और सुंदर सजाते हैं, ताकि देवी लक्ष्मी का आगमन हो सके. इस दिन व्यापारी अपने बही-खाते की पूजा करते हैं और नए साल की शुरुआत करते हैं।
दिवाली का त्योहार (सौ.सोशल मीडिया)
4-गोवर्धन पूजा (अन्नकूट)
दीपावली के चौथे दिन को गोवर्धन पूजा के रूप में जाना जाता है इस दिन अन्नकूट का आयोजन किया जाता हैं तो कई प्रकार के व्यंजन अर्पित किए जाते हैं यह दिन प्रकृति और अन्न के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का प्रतीक माना जाता है। इस खास दिन के पीछे की मान्यता यह है कि, इस दिन भगवान कृष्ण ने अपने गांववासियों को इंद्रदेव की पूजा करने से रोका और गोवर्धन पर्वत की पूजा करने की सलाह दी, इंद्रदेव नाराज हो गए और गांव पर भारी बारिश कर दी, तब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठाकर गांववासियों की रक्षा की।
5-भाई दूज
दीपावली का पांचवा दिन भाईदूज को समर्पित होता हैं यह दिन भी रक्षाबंधन की भांति होती है। भाई दूज के दिन पर बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर मिठाई खिलाती है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए पूजा करती हैं तो भाई अपनी बहनों की रक्षा और उन्हें जीवन भर सहयोग देने का वचन देते हैं। इस दिन को लेकर कहानी कहती है कि, यमुनाजी ने अपने भाई यमराज को अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित किया था. यमराज ने वचन दिया कि जो भाई इस दिन अपनी बहन से तिलक करवाएगा, उसकी उम्र लंबी होगी।