जानिए महाशिवरात्रि से कितनी अलग है सावन शिवरात्रि, क्या होता हैं अंतर
आने वाले दिन 2 अगस्त को सावन शिवरात्रि का त्योहार मनाया जाने वाला है। यह तिथि खास तिथियों में से एक होती है। लेकिन क्या आपने कभी विचार किया है आखिर सावन शिवरात्रि औऱ महाशिवरात्रि में क्या अंतर होता है।
- Written By: दीपिका पाल
महाशिवरात्रि और सावन शिवरात्रि (सौ.सोशल मीडिया)
इन दिनों सावन माह चल रहा है जिसमें कई व्रत-त्योहार एक के बाद एक आते रहते है। इस पावन महीने में भगवान शिव की आराधना की जाती हैं तो वहीं पर कई व्रत शिवभक्त भक्तिभाव से करते है। आने वाले दिन 2 अगस्त को सावन शिवरात्रि का त्योहार मनाया जाने वाला है। यह तिथि खास तिथियों में से एक होती है। लेकिन क्या आपने कभी विचार किया है आखिर सावन शिवरात्रि औऱ महाशिवरात्रि में क्या अंतर होता है।
सबसे फलदायक होता हैं शिवरात्रि व्रत
यहां पर हम बात करे तो, सावन के महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मासिक शिवरात्रि का व्रत किया जाता है, लेकिन इसका महत्व अन्य शिवरात्रि व्रत से अधिक माना गया है। सावन में की गई शिवपूजा महत्व होता है जो अधिक शुभ फल दायिनी होती है। यह आने वाले दिन 2 अगस्त, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
ऐसे समझें महाशिवरात्रि और सावन शिवरात्रि का अंतर
सावन में महाशिवरात्रि और सावन शिवरात्रि का अलग महत्व होता है तो कई बार इसे लोग एक ही मान लेते है लेकिन ऐसा नहीं है। इन दोनों शिवरात्रि में अलग-अलग अंतर होता है।
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1- सावन शिवरात्रि-
इस शिवरात्रि की बात की जाए तो, हर महीने आती है औऱ शिवजी की पूजा इस मौके पर शिवभक्त भक्तिभाव से पूजा करते है। चतुर्दशी तिथि के स्वामी स्वयं महादेव हैं। इसलिए इस हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवजी को प्रसन्न करने के लिए व्रत किया जाता है, इसे मासिक शिवरात्रि और शिव चतुर्दशी कहते हैं। इस तरह फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि और अन्य 11 महीनों के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि का व्रत किया जाता है।
महाशिवरात्रि
सावन शिवरात्रि से अलग महाशिवरात्रि की बात की जाए तो, हर साल फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। ये शैवों का सबसे बड़ा त्योहार है। शिव महापुराण के अनुसार, इसी तिथि पर भगवान शिव ज्योतिर्लिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे। हर साल इस तिथि पर महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। आमतौर पर ये पर्व अंग्रेजी कैलेंडर के फरवरी या मार्च महीने में आता है। कुछ स्थानों पर ये पर्व शिव-पार्वती विवाह के रूप में भी मनाते हैं।
