भगवान विष्णु (सौ. AI)
Kharmas Puja Benefits: 15 मार्च से इस वर्ष 2026 खरमास की शुरुआत हो रही है और इसका समापन 14 अप्रैल 2026 को होगा। ज्योतिष के अनुसार, खरमास के दौरान ग्रहों के राजा सूर्य की चाल धीमी हो जाती है, जिससे उनकी सकारात्मक ऊर्जा में कमी आती है। साथ ही गुरु की राशि में सूर्य का आना शुभ ग्रह गुरु के प्रभाव को भी कम कर देता है।
ऐसे में इस दौरान शुभ एवं मांगलिक कार्य को करने के लिए मना किया जाता है। इन्हीं अवधियों में से एक है खरमास, जिसे मलमास भी कहा जाता है।
धर्म शास्रों के अनुसार, धार्मिक दृष्टि से खरमास का समय अत्यंत पवित्र माना जाता है और इस दौरान पूजा-पाठ, जप और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व बताया गया है। लेकिन, खरमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, सगाई और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरमास का विशेष संबंध भगवान विष्णु से माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में भगवान विष्णु की भक्ति करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
ऐसा माना जाता है कि जब सूर्य देव की स्थिति इस समय कुछ कमजोर मानी जाती है, तब भगवान विष्णु की आराधना से जीवन में संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा आती है। इसी कारण इस पूरे महीने भगवान विष्णु के मंत्रों का जप, कथा सुनना और पूजा करना शुभ माना जाता है।
खरमास के समय को धार्मिक साधना का विशेष अवसर माना गया है। इस दौरान सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की पूजा करना लाभदायक माना जाता है।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस समय विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना, तुलसी के पौधे में जल अर्पित करना और मंदिर में दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
इसके साथ ही जरूरतमंदों को दान देने से भी पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
खरमास के दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नया घर या वाहन खरीदना और मुंडन जैसे मांगलिक संस्कार करने से बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन कार्यों को इस अवधि में करना शुभ नहीं माना जाता।
यह भी पढ़ें-नवरात्रि में घर के मुख्य द्वार पर करें ये आसान उपाय, मां दुर्गा की कृपा से दूर होंगी मुश्किलें
इसी कारण लोग इन महत्वपूर्ण कार्यों को खरमास समाप्त होने के बाद ही करना उचित समझते हैं।
धार्मिक ग्रंथों में खरमास को आत्मचिंतन और भक्ति का समय बताया गया है। इस अवधि में सांसारिक गतिविधियों से थोड़ी दूरी बनाकर भगवान की भक्ति, जप और दान-पुण्य करने से मन को शांति मिलती है।
यही कारण है कि भले ही इस दौरान मांगलिक कार्यों पर रोक रहती हो, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से यह समय बेहद फलदायी और पवित्र माना जाता है।