Kedarnath Kund: केदारनाथ के इन दो दिव्य कुंड का जल पीने से मिलेगी जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति
Kedarnath Kund Moksha Belief : केदारनाथ में स्थित दो पवित्र कुंडों को बेहद दिव्य और चमत्कारी माना जाता है। मान्यता है कि इन कुंडों का जल पीने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
केदारनाथ धाम (सोर्स- सोशल मीडिया)
Kedarnath Spiritual Kund Story: विश्व प्रसिद्ध श्री केदारनाथ धाम के कपाट आज 22 अप्रैल सुबह 8 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। आगामी छह महीनों यानी नवंबर तक श्रद्धालुओं के लिए खुले रहेंगे। हिन्दू धर्म में ये यात्राएं, जिन्हें तीर्थयात्रा या धाम यात्रा के रूप में जाना जाता है, हिन्दू भक्तों के लिए आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व रखती हैं। आपको बता दें, गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की महिमा हिंदू धर्म में खास महत्व हैं।
12 ज्योतिर्लिंग में से एक है केदारनाथ
धर्म शास्त्रों में केदारनाथ 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है और चार धामों में से एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। मान्यता है कि केदारनाथ के दर्शन करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और शिव लोक में स्थान मिलता है।
केदारनाथ धाम के पास कई दिव्य कुंड भी है, जहां लोग दर्शन के लिए जरूर जाते हैं। लोगों की इस दिव्यकुंड से गहरी आस्था है। आज हम आपको इन 2 दिव्य कुंड के बारे में बताने जा रहे हैं, जो केदारनाथ धाम के करीब है।
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दिव्यकुंड के नाम
- उदक कुंड
- अमृत कुंड
उदक कुंड केदारनाथ मंदिर (Kedarnath Kund) से लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित यह पवित्र कुंड विशेष धार्मिक महत्व रखता है। मान्यता है कि इस कुंड में शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल प्रवाहित होकर आता है। यहां एक शिवलिंग भी स्थापित है, जहां श्रद्धालु अभिषेक करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं।
भक्त इस कुंड का जल अपने साथ ले जाना शुभ मानते हैं। धार्मिक विश्वास के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के अंतिम समय में इस जल की कुछ बूंदें उसके मुख में डाली जाएं, तो उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति प्राप्त होती है। इसलिए केदारनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालु इस पवित्र जल को साथ लेकर आना नहीं भूलते।
अमृत कुंडकेदारनाथ
केदारनाथ के निकट एक अन्य पवित्र स्थल अमृत कुंड के नाम से जाना जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इसे बेहद चमत्कारी माना जाता है। मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति को कोई रोग या शारीरिक कष्ट हो, तो इस कुंड के जल का छिड़काव करने से उसके कष्ट कम होते हैं और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं।
कौन से कुंड लापता है
- हंस कुंड
- हवन कुंड
- रेतस कुंड
स्थानीय लोगों के अनुसार, हवन कुंड पहले केदारनाथ मंदिर के ठीक सामने स्थित था, लेकिन यहां आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद यह कुंड अब दिखाई नहीं देता।
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वही, रेतस कुंड को लेकर मान्यता है कि जब कामदेव भस्म हो गए थे, तब देवी रति ने यहां विलाप करते हुए अपने आंसू बहाए थे। इस कुंड की खास बात यह है कि जब कोई श्रद्धालु यहां “ॐ नमः शिवाय” का उच्चारण करता है, तो पानी में बुलबुले उठने लगते हैं।-
हंस कुंड के बारे में कहा जाता है कि यहां ब्रह्मा जी ने हंस का रूप धारण किया था। इस पवित्र कुंड में पितरों का तर्पण और अस्थि विसर्जन किया जाता है। मान्यता है कि यहां किसी मृत व्यक्ति की जन्मकुंडली विसर्जित करने से उसकी आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
