भगवान शिव के इन 5 स्वरूपों के दर्शन से बदल जाएगी किस्मत! जानिए काशी विश्वनाथ मंदिर की 5 आरतियों का रहस्य
Mahashivratri In Kashi: काशी विश्वनाथ मंदिर में होने वाली पांच आरतियां भगवान शिव के पांच दिव्य स्वरूपों का प्रतीक मानी जाती हैं। मंगला से लेकर शयन आरती तक हर अनुष्ठान का अपना आध्यात्मिक महत्व है।
- Written By: सीमा कुमारी
काशी विश्वनाथ मंदिर (सौ.सोशल मीडिया)
Kashi Vishwanath Temple: महाशिवरात्रि महापर्व के पावन अवसर पर बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी एक दिव्य आलोक से भर उठती है। पूरा शहर “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंजता है और गंगा तट से लेकर विश्वनाथ धाम तक भक्ति का सागर उमड़ पड़ता है।
इस दिन शिवभक्त भोलेनाथ की एक झलक पाने के लिए कई-कई किलोमीटर लंबी कतारों में खड़े दिखाई देते हैं। श्रद्धालु घंटों प्रतीक्षा करते हैं, लेकिन उनके चेहरे पर थकान नहीं, बल्कि गहरी आस्था और उत्साह झलकता है।
मोक्षदायिनी काशी के बारे में कहा जाता है कि यहां कण-कण में भगवान शिव का वास है। विश्वनाथ धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि सृष्टि के सूक्ष्म संचालन का आध्यात्मिक केंद्र है। यहां प्रतिदिन होने वाली पांच प्रहर की आरतियां ब्रह्मांडीय ऊर्जा का जीवंत प्रतीक मानी जाती हैं। ऐसी मान्यता है कि, जो भक्त इन आरतियों में शामिल होता है, उसे असीम शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है।
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काशी विश्वनाथ मंदिर की पांच आरतियों का क्या है दिव्य रहस्य
मंगला आरती: दिन की दिव्य शुरुआत
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में संपन्न होने वाली मंगला आरती सबसे विशेष मानी जाती है। प्रातः लगभग 3:00 से 4:00 बजे के बीच होने वाला यह अनुष्ठान आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
मान्यता है कि इस समय महादेव अपने निराकार स्वरूप से साकार रूप में आते हैं। इस आरती के दर्शन से भक्त का पूरा दिन सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है और जन्मों के पापों का नाश होता है।
भोग आरती: महादेव को नैवेद्य अर्पण
दोपहर में बाबा विश्वनाथ को भोग अर्पित किया जाता है। इस आरती में विविध व्यंजन और फल समर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि इसमें शामिल होने से घर में अन्न-धन की समृद्धि बनी रहती है। यह आरती शिव के पालनहार स्वरूप की स्तुति मानी जाती है।
संध्या आरती: शाम का अलौकिक क्षण
दिन और रात के संगम पर संध्या आरती होती है। मान्यता है कि यह समय नकारात्मकता दूर करने के लिए विशेष होता है। मंत्रों और घंटों की ध्वनि से वातावरण भक्तिमय और पवित्र हो उठता है।
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श्रृंगार आरती: भव्यता का स्वरूप
रात के समय होने वाली श्रृंगार आरती में बाबा का दिव्य श्रृंगार किया जाता है। शास्त्रों के मुताबिक, इसमें बाबा को फूलों, आभूषणों और सुगंधित द्रव्यों से सजाया जाता है। यह आरती शिव के ऐश्वर्य और सुंदरता का प्रतीक है। इस आरती के दर्शन से मानसिक शांति और पारिवारिक सुख मिलता है।
शयन आरती: महादेव का विश्राम
दिन की अंतिम आरती ‘शयन आरती’ होती है। पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार, इस आरती के बाद महादेव विश्राम के लिए चले जाते हैं। यह आरती बहुत ही शांत और मधुर होती है। शयन आरती के दर्शन से व्यक्ति को भय से मुक्ति मिलती है और रात में सुखद निद्रा प्राप्त होती है।
