कलियुग में बस एक काम कर लो, जीवन बदल जाएगा, श्री प्रेमानंद जी महाराज ने बताया ऐसा उपाय जो हर दुख मिटा सकता है
Shri Premananda Ji Maharaj Talks: संतों और महापुरुषों के अनुसार कलियुग दोषों का महासागर माना जाता है, लेकिन इसके बीच एक ऐसा गुण भी है जो इंसान के जीवन को बदल सकता है।
- Written By: सिमरन सिंह
Premananda Ji Maharaj (Source. Pinterest)
Premananda Ji Maharaj Discourse: संतों और महापुरुषों के अनुसार कलियुग दोषों का महासागर माना जाता है, लेकिन इसके बीच एक ऐसा गुण भी है जो इंसान के जीवन को बदल सकता है। प्रसिद्ध संत श्री प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि इस युग में भगवान के पवित्र नाम का निरंतर जाप ही सबसे बड़ा सहारा है। वे कहते हैं कि इंसान अक्सर माया के रास्ते पर भटक जाता है और छोटी-छोटी इच्छाओं के लिए जीवन भर भटकता रहता है, जबकि भगवान के नाम में ही अनंत शक्ति और सुख का खजाना छिपा हुआ है।
भगवान के नाम में छिपा है अनंत खजाना
श्री प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि भगवान ने अपनी सारी शक्ति, महिमा और मधुरता अपने नाम में समेट दी है। जैसे राजा के पास खजाना होता है, वैसे ही भगवान का नाम भी भक्तों के लिए मंगल भवन है, जो जीवन के दुखों को समाप्त कर सकता है। वे कहते हैं कि चाहे आप राधा, कृष्ण या हरि का नाम लें, यह समझ लें कि नाम और नामी एक ही हैं। भगवान का नाम लेने से वही फल मिलता है जो भगवान के साक्षात दर्शन से मिलता है। अन्य युगों में कठिन तपस्या और बड़े-बड़े यज्ञ जरूरी थे, लेकिन कलियुग में केवल नाम जप से भी भगवान की प्राप्ति संभव है।
वाणी और व्यवहार पर रखें नियंत्रण
आध्यात्मिक जीवन में सबसे महत्वपूर्ण बात है वाणी की शुद्धता। श्री प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि कठोर और कड़वे शब्द किसी के दिल को तीर से भी ज्यादा चोट पहुंचा सकते हैं। उनके अनुसार, किसी महान भक्त या महा भागवत की निंदा करना अत्यंत बड़ा पाप है। ऐसा करने से व्यक्ति की श्रद्धा कमजोर हो जाती है और उसका भजन भी रुक सकता है।
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जीवन में अपनाएं ये तीन जरूरी गुण
भगवान के नाम का प्रभाव देखने के लिए व्यक्ति को अपने स्वभाव में कुछ बदलाव करने चाहिए।
- दूसरों के प्रति संवेदना रखें: दूसरों के साथ वैसा व्यवहार न करें जो आपको खुद बुरा लगे।
- दृष्टि की पवित्रता: हर स्त्री को माता के रूप में देखें और धन-संपत्ति के प्रति मोह कम करें।
- विनम्रता: जब मन में विनम्रता आती है तो इंसान दूसरों की गलतियां ढूंढने के बजाय उनका सम्मान करना सीख जाता है।
गलत संगति से बचना है जरूरी
श्री प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि आज के समय में कई लोग गलत विचारों से भटक रहे हैं और भगवान के अस्तित्व को ही नकारने लगे हैं। वे समझाते हैं कि जैसे समुद्र में गिरकर पानी की बूंद समुद्र बन जाती है, लेकिन बूंद कभी यह नहीं कह सकती कि उसने समुद्र को बनाया है। इसी तरह, भगवान से दूर होकर कोई भी व्यक्ति सच्चा मार्गदर्शन नहीं दे सकता। इसलिए कुसंग से बचना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह मन को विष की तरह प्रभावित करता है।
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जीवन का सबसे बड़ा साधन
महाराज जी कहते हैं कि जीवन में संतुलन बनाए रखें। शरीर से अपने कर्तव्य निभाएं, लेकिन जिह्वा पर भगवान का नाम बनाए रखें। वे बताते हैं कि भगवान का नाम एक बॉडीगार्ड की तरह है, जो इंसान को डर, चिंता और दुख से बचाता है। यदि व्यक्ति पूरी श्रद्धा से ‘राधा-राधा’ का नाम जपता रहे, तो कोई भी संकट उसे पराजित नहीं कर सकता। धीरे-धीरे जब यह नाम दिल से निकलने लगेगा, तब भगवान से मिलने की योग्यता भी प्राप्त हो जाएगी।
