कालभैरव(सौ.सोशल मीडिया)
Kalashtami Remedies: इस साल वैशाख महीने का पहला कालाष्टमी का व्रत 10 अप्रैल, शुक्रवार को रखा जा रहा है। हिन्दू धर्म में कालाष्टमी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त कालाष्टमी के दिन विधि-विधान से कालभैरव की पूजा करते हैं, उनके जीवन से नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं और शनि, राहु-केतु जैसे क्रूर ग्रहों का दुष्प्रभाव भी शांत होता है।
ज्योतिषयों के अनुसार, इस साल वैशाख माह की कालाष्टमी पर कई विशेष संयोग बन रहे हैं। जिस वजह से इस दिन का महत्व बढ़ गया है। ज्योतिषयों का कहना है कि, वैशाख माह की कालाष्टमी पर कुछ ज्योतिष उपाय अपनाने से जातक को विशेष लाभ मिल सकता है।
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 9 अप्रैल 2026 को रात 09: 19 मिनट से शुरू होकर और 10 अप्रैल 2026 को रात 11: 15 मिनट पर समाप्त होगी। धर्म शास्त्रों में काल भैरव की उपासना के लिए यानी कालाष्टमी की पूजा निशा काल में करना शुभ बताया गया है। इसलिए इस बार यह व्रत 10 अप्रैल 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा।
धर्म ग्रथों में काल भैरव की पूजा निशा काल यानी रात्रि में करना फलदायी बताया गया है। क्योंकि, काल भैरव का जन्म रात्रि में हुआ था, इसलिए उनकी पूजा रात के समय करना अधिक फलदायी माना जाता है। इस दौरान विधि-विधान से पूजा करने पर व्यक्ति को विशेष कृपा प्राप्त होती है और भय, रोग तथा शत्रुओं से मुक्ति मिलती है।
कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते को मीठी रोटी या गुड़ लगी रोटी खिलाने से राहु और केतु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। यदि काला कुत्ता न मिले तो किसी भी कुत्ते को खिलाया जा सकता हैं।
शनि दोष से मुक्ति के लिए शाम के समय कालभैरव के मंदिर में जाकर सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं. साथ ही ‘ॐ कालभैरवाय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें. इससे कोर्ट-कचहरी और शत्रुओं की बाधा दूर होती है।
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अगर शनि की महादशा भारी है, तो भैरव जी को शमी के पत्ते और काले तिल अर्पित करें। इससे भगवान शिव और भैरव दोनों प्रसन्न होते हैं और आकस्मिक संकटों से रक्षा करते हैं।
काल भैरव को प्रसन्न करने के लिए कालाष्टमी पर नींबू से जुड़े उपाय करना बड़ा कारगर बताया गया है। कालसर्प दोष और ग्रहों के बुरे प्रभावों को कम करने के लिए काल भैरव मंदिर में नींबू अर्पित करें