शनिवार को है कालाष्टमी, इस मुहूर्त में करें कालभैरव की पूजा, दोगुना फल मिलने के हैं योग
Kalashtami: काल भैरव देव को समर्पित कालाष्टमी व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस बार 16 अगस्त को भाद्रपद माह की कालाष्टमी मनाई जाएगी। आइए जानते है इस व्रत से जुड़े सबकुछ।
- Written By: सीमा कुमारी
कालाष्टमी (सौ.सोशल मीडिया)
Kalashtami 2025: भगवान शिव के रौद्ररूप काल भैरव को समर्पित कालाष्टमी व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस बार 16 अगस्त को भाद्रपद माह की कालाष्टमी मनाई जाएगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव देव की पूजा करने से सभी प्रकार के दुख और संकट दूर हो जाते हैं।
साथ ही हर मनोकामना पूरी होती है। इस शुभ अवसर पर मंदिरों में भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। आइए, अगस्त माह की कालाष्टमी की सही डेट एवं शुभ मुहूर्त जानते हैं-
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कब मनाई जाएगी कालाष्टमी शुभ मुहूर्त
आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, 15 अगस्त को रात 11 बजकर 49 मिनट से भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि शुरू होगी। वहीं, 16 अगस्त को रात 09 बजकर 34 मिनट पर भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि समाप्त होगी। काल भैरव देव की निशा काल में पूजा की जाती है।
इसके लिए 16 अगस्त को भाद्रपद माह की कालाष्टमी मनाई जाएगी। वहीं, निशा काल में पूजा का समय देर रात 11 बजकर 19 मिनट से लेकर 12 बजकर 03 मिनट तक है।
कालाष्टमी पर बन रहे शुभ योग
ज्योतिषियों की मानें तो, भाद्रपद माह की कालाष्टमी पर वृद्धि और ध्रुव योग का संयोग बन रहा है। वृद्धि योग सुबह 07 बजकर 21 मिनट तक है।
इस दौरान देवों के देव महादेव कैलाश पर जगत की देवी मां पार्वती के साथ रहेंगे। ध्रुव योग में काल भैरव देव की पूजा करने से साधक को दोगुना फल मिलेगा। साथ ही सभी बिगड़े काम बन जाएंगे।
पंचांग
सूर्योदय – सुबह 05 बजकर 14 मिनट पर
सूर्यास्त – शाम 06 बजकर 07 मिनट पर
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 03 बजकर 45 मिनट से 04 बजकर 29 मिनट तक
विजय मुहूर्त – दोपहर 01 बजकर 50 मिनट से 02 बजकर 41 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 07 मिनट से 06 बजकर 30 मिनट तक
निशिता मुहूर्त – रात्रि 11 बजकर 19 मिनट से 12 बजकर 03 मिनट तक
कालाष्टमी पर करें भगवान शिव की पूजा :
- भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर सुबह सूर्योदय से पहले उठें।
- अब काल भरैव देव को ध्यान कर दिन की शुरुआत करें।
- इसके बाद घर की साफ-सफाई करें।
- इसके बाद गंगाजल युक्त पानी से स्नान करें।
- इसके बाद आचमन कर नवीन वस्त्र धारण करें।
- इस समय सबसे पहले सूर्य देव को जल अर्पित करें।
- तंदोपरांत, पंचोपचार कर देवों के देव महादेव की भक्ति भाव से पूजा करें।
- देवों के देव महादेव को फल, फूल और मिठाई अर्पित करें।
- पूजा के समय शिव चालीसा का पाठ और मंत्र का जप करें।
- वहीं, संध्याकाल में भगवान शिव जी की आरती करें।
- आरती के बाद भगवान शिव से सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करें।
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