

Kajari Teej Par Chand Ki Puja: आज कजरी तीज मनाई जा रही है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह पर्व बड़ा महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और संतान की खुशहाली की कामना रखते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। इस व्रत में चंद्रदेव की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने का विशेष महत्व बताया गया है।
धर्म शास्त्रों और ज्योतिष के अनुसार, कजरी तीज पर चांद को अर्घ्य देने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धर्म शास्त्रों में चंद्रमा को मन और शीतलता का कारक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि कजरी तीज पर चांद को अर्घ्य देने से पति-पत्नि के रिश्ते में मधुरता, प्यार और विश्वास बना रहता है और पति को लंबी आयु होती है।
इसके अलावा, चंद्रमा भगवान शिव के मस्तक पर विभूषित हैं। चंद्र देव को जल अर्पित करने से महादेव और माता पार्वती दोनों का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त होता है। ऐसा माना जाता है कि चंद्र देव की किरणें जीवन से तनाव और नकारात्मकता को दूर कर सुखी दांपत्य जीवन बनाए रखती है।
तांबे या पीतल के लोटे में शुद्ध जल भरें। इसमें थोड़ा सा कच्चा दूध, रोली, अक्षत और सफेद फूल मिलाएं।
रात्रि में चंद्रोदय के बाद हाथ में छलनी और पूजा की थाली लेकर अर्घ्य देने वाले स्थान पर जाएं। छलनी से चंद्रमा का दर्शन करें।
चंद्रमा की ओर देखते हुए लोटे से जल की धारा नीचे किसी साफ पात्र या गमले में गिराएं।
उसके बाद जल अर्पित करते समय चंद्रमा के मंत्रों का उच्चारण करें।
अर्घ्य देने के बाद अपनी ही जगह पर तीन बार घूमकर परिक्रमा करें और पूजा में हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा मांगें।
इसके पश्चात छलनी से अपने पति का चेहरा देखें और उनके हाथों से जल ग्रहण करके अपना निर्जला व्रत खोलें।
सुहागिन महिलाओं के लिए कजरी तीज का विशेष महत्व होता है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने के से दांपत्य जीवन में मजबूती आती है और सुख-समृद्धि का वास होता है। इस दिन विवाहित महिलाएं सोलह श्रृंगार करके व्रत करती हैं, जो सौभाग्य और समर्पण का प्रतीक है। इस पर्व पर गीत-संगीत और लोक नृत्य का भी विशेष महत्व है, जिसमें महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर झूला झूलती हैं और कजरी गीत गाती हैं।