

Kajari Teej Vrat Katha In Hindi : हर साल भादो महीने के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला कजरी तीज का त्यौहार मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान और बिहार में बहुत ही धूमधाम एवं उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस साल 31 अगस्त 2026, सोमवार को मनाया जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रहती हैं और पूजा के समय इस पावन कथा को जरूर पढ़ती हैं।
कजरी तीज की पौराणिक कथा के अनुसार एक समय की बात है एक गरीब ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ किसी गांव में रहता था। उसकी पत्नी बहुत धर्मपरायण और भगवान शिव-पार्वती की उपासक थी। जब भाद्रपद का महीना शुरू हुआ तो उस स्त्री ने कजरी तीज का व्रत करने का संकल्प लिया।
गरीब ब्राह्मण की पत्नी का ऐसा विश्वास था कि इस व्रत को करने से पति को लंबी आयु की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-शांति आती है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया के दिन वह प्रात:काल स्नान कर, निर्जल उपवास रख शिव-पार्वती की पूजा करने लगी। लेकिन उसे मन ही मन यह चिंता सताई कि पूजा में भगवान को भोग में क्या अर्पित करें, क्योंकि उसके घर में खाने को कुछ भी नहीं था।
बहुत खोजने के बाद उसे अपने घर में एक कच्चा पेठा मिला, जिसे उसने अच्छे से साफ किया और पूरी श्रद्धा से भगवान को भोग लगाया।
उसी गांव की रानी भी कजरी तीज का व्रत कर रही थी। उसने सोने-चांदी के बर्तनों में भव्य पकवान बनाए और रत्नों से सजे मंदिर में भगवान की पूजा की, लेकिन उसका मन दिखावे और अहंकार से भरा था।
शाम के समय भगवान शिव और माता पार्वती ने अपने दोनों भक्तों की भक्ति की परीक्षा लेने का विचार किया।
वे ब्राह्मण स्त्री के घर एक साधु के रूप में पहुंचे और उससे कच्चा पेठा मांगा जो उसने भोग में चढ़ाया था। स्त्री ने बड़े ही प्रेमपूर्वक वह पेठा उन्हें दे दिया। साधु रूप में आए भगवान ने उस स्त्री से कहा कि तुम्हारी श्रद्धा और समर्पण से हम अत्यंत प्रसन्न हैं। तुम्हारा घर शीघ्र ही धन-धान्य से भर जाएगा और तुम्हारे पति को दीर्घायु की प्राप्ति होगी। जिसके बाद उस गरीब दंपत्ति के सारे कष्ट दूर हो गए और उनका घर धन-धान्य से भर गया।