ज्येष्ठ महीने के हर मंगलवार करें ये उपाय, हनुमान जी की कृपा से जॉब और बिजनेस में मिलेगी बड़ी कामयाबी

Jyeshtha Month Puja Vidhi :ज्येष्ठ महीने के हर मंगलवार ये उपाय करने से हनुमान जी की कृपा मिलती है और नौकरी व व्यापार में सफलता और तरक्की प्राप्त होती है।
Jyeshtha Tuesday Remedies
हनुमान जी (Source. Pinterest)
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Jyeshtha Tuesday Remedies: सनातन धर्म में ज्येष्ठ माह का बड़ा महत्व बताया गया है। खासतौर पर, इस महीने में पड़ने वाले बड़ा मंगल का। इसे बुढ़वा मंगल के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, ज्येष्ठ मास के मंगलवार के दिन ही पहली बार हनुमान अपने प्रभु श्रीराम से मिले थे इसलिए इस महीने के मंगलवार का महत्व बढ़ जाता है।

कहा जाता है कि ज्येष्ठ मास  (Jyeshtha Tuesday) का बड़ा मंगल हर प्रकार की मनोकामना को पूर्ण करता है। इसलिए, इस दौरान हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

ज्येष्ठ महीने में 8 मंगलवार का विशेष संयोग

पंचांग की गणना के अनुसार, इस वर्ष 2026 में ज्येष्ठ महीने में 8 मंगलवार का विशेष संयोग बन रहा है। यह संयोग अधिक मास की वजह से बना है।

ज्येष्ठ महीने में पड़ने वाले बड़े मंगल को क्या करना चाहिए ?

  • आर्थिक तंगी से निजात

ज्योतिषयों के अनुसार, अगर आप आर्थिक तंगी से परेशान हैं, तो ज्येष्ठ माह के हर मंगलवार, खासकर बड़ा मंगल के दिन, हनुमान मंदिर में बैठकर श्रद्धा से रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करें। मान्यता है कि इससे हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और कर्ज से राहत मिलती है।

  • करियर में तरक्की के नए अवसर

अगर करियर में मेहनत के बावजूद पहचान नहीं मिल रही या प्रमोशन रुका हुआ है, तो ज्येष्ठ माह के हर मंगलवार को हनुमान जी के चरणों में मीठा पान अर्पित करें। मान्यता है कि इससे बाधाएं दूर होती हैं और करियर में तरक्की के नए अवसर मिलते हैं।

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  • मांगलिक दोष से निजात

अगर शादी में बार-बार बाधाएं आ रही हैं या मांगलिक दोष की चिंता है, तो ज्येष्ठ माह के हर मंगलवार को हनुमान जी को लाल चोला अर्पित करें। मान्यता है कि इससे विवाह में देरी दूर होती है और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है।

  • शारीरिक कष्टों से मुक्ति

तनाव, मानसिक पीड़ा या लंबी बीमारी से राहत के लिए ज्येष्ठ माह के हर मंगलवार को हनुमान जी को सुगंधित इत्र और केवड़े की माला अर्पित करें। साथ ही लाल वस्त्र धारण करें, जो ऊर्जा और साहस का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इससे भय और कष्ट कम होते हैं।

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