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Jagannath Temple: पुरी के जगन्नाथ मंदिर का वो रहस्य… जब ‘कड़वे नीम का चूर्ण’ बन गया भगवान का सबसे प्रिय भोग

Jagannath Temple Rituals: पुरी के जगन्नाथ मंदिर में भगवान को अर्पित होने वाले भोगों से जुड़ी कई अनोखी परंपराएं हैं। इन्हीं में से एक है कड़वे नीम के चूर्ण का विशेष महत्व।

  • Written By: सीमा कुमारी
Updated On: Jul 01, 2026 | 08:30 PM

भगवान जगन्नाथ को अतिप्रिय है नीम का भोग (सौ.AI)

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Why Neem Churna Is Offered To Lord Jagannath: उड़ीसा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर केवल अपने चमत्कारों, भव्य रथयात्रा और 56 भोग की परंपरा के लिए ही नहीं, बल्कि भगवान और भक्त के बीच अटूट प्रेम की अनोखी कथाओं के लिए भी जाना जाता है। यहां निभाई जाने वाली कई परंपराएं आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं। ऐसी ही एक रहस्यमयी परंपरा है भगवान जगन्नाथ को कड़वे नीम का चूर्ण अर्पित करने की, जिसके पीछे छिपी कथा हर श्रद्धालु को भावुक कर देती है।

जब एक मां को सताने लगी अपने ‘लाल’ के स्वास्थ्य की चिंता

सदियों पुरानी मान्यता के अनुसार, पुरी धाम में ‘लेंडी माता’ नाम की एक वृद्ध महिला रहती थीं। वे भगवान जगन्नाथ की अनन्य भक्त थीं, लेकिन उनका प्रेम एक भक्त का नहीं, बल्कि एक मां का था। उनके लिए जगन्नाथ भगवान नहीं, बल्कि उनका अपना बेटा थे।

रोज़ मंदिर में भगवान को छप्पन प्रकार के स्वादिष्ट, घी-तेल से बने व्यंजन चढ़ते देखकर एक दिन उनके मन में चिंता उठी। उन्होंने सोचा, “इतना भारी भोजन रोज़ खाने से मेरे लाल का पेट खराब न हो जाए?”

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ममता से भरे उस हृदय ने तुरंत उपाय खोजा। उन्होंने नीम की पत्तियों को सुखाकर अपने हाथों से एक औषधीय पाचक चूर्ण तैयार किया, ताकि भगवान का पाचन ठीक रहे। मंदिर के द्वार पर हुआ ऐसा अपमान, जिसे देखकर भगवान भी विचलित हो उठे।

अपने हाथों से बनाया हुआ वह कड़वा नीम चूर्ण लेकर लेंडी माता बड़े प्रेम से मंदिर पहुंचीं। उनका उद्देश्य केवल इतना था कि वे अपने बेटे जगन्नाथ को यह औषधि खिलाएं।

लेकिन मंदिर के मुख्य द्वार पर तैनात सैनिकों और द्वारपालों ने उन्हें रोक दिया। उन्होंने उस चूर्ण का मज़ाक उड़ाया और कहा कि भगवान को केवल शाही छप्पन भोग ही अर्पित किया जा सकता है, ऐसा साधारण और कड़वा चूर्ण नहीं।

अपमानित वृद्धा की आंखों से आंसू बह निकले। वह भारी मन से अपनी कुटिया लौट आईं। उन्हें इस बात का सबसे अधिक दुख था कि वे अपने ‘लाल’ की सेहत के लिए लाई औषधि भी उसे नहीं खिला सकीं।

*फिर उसी रात हुआ ऐसा चमत्कार… जिसने राजा की नींद उड़ा दी*

कहते हैं, भगवान अपने सच्चे भक्त का अपमान कभी सहन नहीं करते। उसी रात भगवान जगन्नाथ स्वयं पुरी के राजा के स्वप्न में प्रकट हुए। महाप्रभु अत्यंत क्रोधित थे। उन्होंने राजा से कहा, “आज तुम्हारे सैनिकों ने मेरी सबसे प्रिय भक्त का अपमान किया है। वह मेरे स्वास्थ्य की चिंता में मेरे लिए नीम का पाचक चूर्ण लाई थी, लेकिन उसे मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया। तुम्हारा छप्पन भोग मुझे स्वीकार नहीं… मैं आज भूखा हूं।”

भगवान ने राजा को आदेश दिया कि सुबह होते ही वे स्वयं उस वृद्धा के घर जाएं, उनसे क्षमा मांगें और उनके हाथों से तैयार किया गया नीम का चूर्ण मंदिर लाकर मुझे भोग के रूप में अर्पित करें।

सुबह होते ही टूट गया राजा का अहंकार

सुबह होते ही राजा अपनी सेना के साथ सीधे लेंडी माता की कुटिया पहुंचे। वहां उन्होंने वृद्धा के चरणों में झुककर क्षमा मांगी और रात के स्वप्न की पूरी घटना सुनाई। यह सुनकर वृद्धा की आंखें भर आईं। उन्होंने फिर से अपने हाथों से नीम का चूर्ण तैयार किया। राजा स्वयं उस चूर्ण को अत्यंत सम्मान के साथ पालकी में रखकर मंदिर लाए और भगवान जगन्नाथ को भोग अर्पित किया।उसी क्षण से राजा का यह भ्रम भी टूट गया कि भगवान केवल राजसी वैभव और महंगे भोग से ही प्रसन्न होते हैं।

ये भी पढ़ें- Vastu Rules: क्या आपके घर की दहलीज बन रही है दरिद्रता का कारण? वास्तु के अनुसार भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां

आज भी निभाई जाती है यह अनोखी परंपरा

मान्यता है कि तभी से पुरी के जगन्नाथ मंदिर में छप्पन भोग के बाद भगवान को विशेष रूप से कड़वे नीम का चूर्ण चखाने की परंपरा चली आ रही है। इसे भगवान के पाचन और स्वास्थ्य की प्रतीकात्मक चिंता के रूप में अर्पित किया जाता है।

इस रहस्य के पीछे छिपा है सबसे बड़ा संदेश

यह अद्भुत कथा हमें बताती है कि भगवान के लिए भोग का वैभव नहीं, भक्त का निष्कपट प्रेम और सच्चा भाव सबसे बड़ा होता है। एक साधारण वृद्धा का प्रेम उस छप्पन भोग पर भी भारी पड़ गया, जिसे राजा अपनी सबसे बड़ी श्रद्धा मानता था।

इसीलिए कहा जाता है—भगवान वस्तुओं के नहीं, भावनाओं के भूखे होते हैं। यही कारण है कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर में आज भी यह रहस्यमयी और अनूठी परंपरा सदियों से श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है।

Jagannath temple neem churna favorite bhog mystery

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Published On: Jul 01, 2026 | 08:30 PM

Topics:  

  • Dharma
  • Jagannath Temple
  • Religion News

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