सुख-समृद्धि और सौभाग्य के लिए वास्तु के अनुसार स्थापित करें श्री गणेश जी की प्रतिमा, कैसी हो जानिए
सबसे पहले पूजा भगवान श्रीगणेशजी की करने का विधान होता हैं जो हर कोई भली भांति करते हैं। ऐसे में 7 सितंबर से गणेश उत्सव की शुरुआत होने जा रही है इस दिन से 10 दिनों के लिए गणपति बप्पा धरती पर विराजमान होगें। यहां पर वास्तु के नियम के अनुसार आप बप्पा की प्रतिमा की स्थापना कर सकते हैं औऱ पूजा करके आशीर्वाद पाएं।
- Written By: दीपिका पाल
गणेश चतुर्थी पर वास्तु नियम (सौ.सोशल मीडिया)
दस दिवसीय गणेशोत्सव का महापर्व ‘गणेश चतुर्थी’ (Ganesh Chaturthi) जल्द आने वाला है। ज्ञान, बुद्धि और सौभाग्य के देवता भगवान गणेश को समर्पित ‘गणेश चतुर्थी’ (Ganesh Chaturthi) का पर्व सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है। यूं तो गणेश जी की पूजा हर माह में दो बार पड़ने वाली चतुर्थी तिथि को पूरे विधि-विधान से की जाती है। लेकिन, इसका महत्व हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी तिथि को बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। क्योंकि, मान्यता है कि इसी दिन गौरी पुत्र गणेश का जन्म हुआ था।
ज्योतिषियों के अनुसार, सभी देवी-देवताओं में भगवान गणेश की पूजा का खास महत्व है। भगवान गणेश को मंगलकर्ता, विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देव कहा जाता है। इसलिए नए घर की पूजा हो, मंगल कार्य हो या विशेष अनुष्ठान सबसे पहले विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
जानें गणेशजी की प्रतिमा स्थापना के नियम
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, घर में गणेशजी की प्रतिमा रखना बहुत ही शुभ माना जाता है। लेकिन, वास्तु-शास्त्र में घर में कुछ ऐसे नियम बनाए गए हैं। यदि आप भी अपने घर में सौभाग्य, प्रसिद्धि और खुशियां चाहते हैं तो उन्हें अपने घर में गणेशजी की प्रतिमा स्थापित करते समय कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए।
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- वास्तु सलाहकार के अनुसार, घर में गणेश की मूर्ति या फोटो को पश्चिम, उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा में रखना अच्छा होता है। याद रखें कि गणेश की सभी फोटो का मुंह उत्तर दिशा में होना चाहिए।
- ऐसी मान्यता है कि इस दिशा में भगवान शिव, जो गणेश जी के पिता हैं, रहते हैं। आप गणेश की मूर्ति को मुख्य द्वार पर रखें, जिसका चेहरा एंट्रेंस की दिशा में हो। भगवान गणेश की मूर्ति के मुंह को कभी भी दक्षिण दिशा में न रखें।
- वास्तु-शास्त्र के अनुसार, घर में श्वेतार्क गणेश जी की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए। साथ ही उनकी रोजाना पूजा करनी चाहिए। इस तरह की मूर्ति घर में लगाने से धन संपदा की कोई कमी नहीं रहती है।
- वास्तु-शास्त्र में क्रिस्टल को सबसे उत्तम धातु माना गया है। अगर हम घर में क्रिस्टल से बनी गणेश जी की मूर्ति स्थापित करना बहुत ही शुभ माना जाता है। गणेशजी के साथ साथ क्रिस्टल की लक्ष्मी की पूजा करना धन सौभाग्य देने वाला है।
- इसके अलावा, वास्तु-शास्त्र के अनुसार, घर में जब भी गणेशजी की मूर्ति हमेशा बैठी हुई मुद्रा में ही स्थापित करें। गणेशजी की प्रतिमा घर के दरवाजे के बाहर नहीं लगानी चाहिए। अगर आपको गणेशजी की प्रतिमा खड़ी हुई मुद्रा में लगानी है तो आप अपने कार्यस्थल या ऑफिस की डेस्क पर लगा सकते हैं।
- ज्योतिष गुरु के अनुसार, गणेशजी की मूर्ति अलग-अलग रंगों में मिलती है। घर में तरक्की के लिए सिंदूरी रंग की मूर्ति लगानी चाहिए। तरक्की के लिए सफेद रंग की मूर्ति रखना भी काफी शुभ है। हालांकि, ध्यान रखें की आप इस तरह की मूर्ति घर के दरवाजे पर स्थापित न करें।
- कहते हैं, आम, पीपल और नीम से बनी गणेश जी मूर्ति घर के अंदर जरूर रखनी चाहिए। साथ ही ध्यान रखें की घर के मुख्य द्वार पर गणेशजी की प्रतिमा जरूर स्थापित करनी चाहिए।
- जब भी गणपति की मूर्ति घर के भीतर लगाएं तो उसके सूड़ के बारे में विशेष ध्यान रखें। वास्तुशास्त्र के अनुसार, यह ध्यान रखें कि मूर्ति की सूड़ बाईं दिशा में ही हो। दाईं दिशा में सूड़ का होना शुभ नहीं माना जाता।
- जब भी गणेश की मूर्ति खरीदें, यह ध्यान रखें मूर्ति में लड्डू और चूहा जरूर बने हों। ऐसा इसलिए क्योंकि चूहा गणेश का वाहन माना जाता है। जबकि ऐसी मान्यता है कि लड्डू गणेश जी का फेवरेट स्वीट है। गणेश मूर्ति वहां लगाई जानी चाहिए, जहां घर का एंट्रेंस हो।
- चूहा चीजों के प्रति हमारे मन की इच्छा को व्यक्त करता है, जो इच्छाओं से भरा हुआ है। हालांकि चूहा छोटा होता है और उसके दांत बहुत छोटे होते हैं लेकिन यह लगातार कुतरने की प्रवृत्ति के कारण बड़े से बड़े भंडार को खाली कर सकता है।
- इसी के पैरेलल एक चूहा हम सभी के भीतर है। ये हैं हमारी इच्छाएं। हमारी ये इच्छाएं हमारे भीतर की सारी अच्छाइयों, भले ही वे बहुत सारी हों, को खा जाती हैं।
- इसलिए यह जरूरी है कि गणेश की मूर्ति खरीदने से पहले ये सभी जरूरी चीजें नोट या याद कर लें।
लेखिका- सीमा कुमारी
