नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें मां के इस स्वरूप की महिमा और पूजा-विधि
आज शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। ये मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप और नौ शक्तियों में से दूसरी शक्ति हैं। इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना करने से साधक को सकल मनोरथ सिद्ध होते हैं। साथ ही, घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है।
- Written By: सीमा कुमारी
मां ब्रह्मचारिणी (सो.सोशल मीडिया)
Maa Brahmacharini puja: आज यानी 4 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है। आज का दिन माता दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप को समर्पित है। इस दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही विशेष कार्य में सिद्धि पाने हेतु व्रत भी रखा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना करने से साधक को सकल मनोरथ सिद्ध होते हैं। साथ ही, घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है। अतः साधक विधि विधान से नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं। अगर आप भी मां ब्रह्मचारिणी की कृपा के भागी बनना चाहते हैं, तो इस विधि से मां की पूजा-उपासना करें। ऐसे में आइए जानते हैं मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि और इसकी महिमा –
ऐसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
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शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए सबसे पहले
ब्रह्ममुहूर्त पर उठकर स्नान कर लें।
पूजा के लिए सबसे पहले आसन बिछाएं इसके बाद आसन पर बैठकर मां की पूजा करें।
माता को फूल, अक्षत, रोली, चंदन आदि चढ़ाएं।
ब्रह्मचारिणी मां को भोगस्वरूप पंचामृत चढ़ाएं और मिठाई का भोग लगाएं।
साथ ही माता को पान, सुपारी, लौंग अर्पित करें।
इसके उपरांत देवी ब्रह्मचारिणी मां के मंत्रों का जाप करें और फिर मां की आरती करें।
कैसा है मां ब्रह्मचारिणी स्वरूप
देवी ब्रह्मचारिणी साक्षात ब्रह्म का स्वरूप है अर्थात तपस्या का मूर्तिमान रूप है। ब्रह्म का मतलब तपस्या होता है, तो वहीं चारिणी का मतलब आचरण करने वाली। इस तरह ब्रह्मचारिणी का अर्थ है- तप का आचरण करने वाली देवी। मां ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में मंत्र जपने की माला और बाएं में कमंडल है।
मां ब्रह्मचारिणी की क्या है महिमा
माता ब्रह्मचारिणी हमें यह संदेश देती हैं कि जीवन में बिना तपस्या अर्थात कठोर परिश्रम के सफलता प्राप्त करना असंभव है। बिना श्रम के सफलता प्राप्त करना ईश्वर के प्रबंधन के विपरीत है। अत: ब्रह्मशक्ति अर्थात समझने व तप करने की शक्ति हेतु इस दिन शक्ति का स्मरण करें। योग-शास्त्र में यह शक्ति स्वाधिष्ठान में स्थित होती है। अत: समस्त ध्यान स्वाधिष्ठान में करने से यह शक्ति बलवान होती है एवं सर्वत्र सिद्धि व विजय प्राप्त होती है।
