

धनतेरस और दिवाली पर धन लक्ष्मी पोटली बनाने की परंपरा है।
पोटली बनाने के लिए लाल या पीला कपड़ा इस्तेमाल किया जाता है।
इसमें 5 या 7 कौड़ियां, कमलगट्टा, हल्दी की गांठ और सिक्का रखा जाता है।
पोटली में अक्षत, सुपारी और लाल मौली भी रख सकते हैं।
लक्ष्मी पूजा के बाद इसे पूजा स्थल, तिजोरी या अलमारी में रखा जाता है।
Dhan Lakshmi Potli Kaise Banaye: धनतेरस और दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के साथ कई पारंपरिक उपाय भी किए जाते हैं। इन्हीं में से एक है धन लक्ष्मी पोटली तैयार करना। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस पोटली में रखी जाने वाली कौड़ी, कमलगट्टा, हल्दी और सिक्का शुभता व समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं। कई लोग इसे लक्ष्मी पूजा के बाद अपनी तिजोरी या पूजा स्थल पर रखते हैं।
ऐसे में अगर आप भी इस बार घर पर धन लक्ष्मी पोटली बनाना चाहते हैं, तो जानिए इसके लिए किन चीजों की जरूरत होगी, इसे कैसे तैयार करें और इसका क्या धार्मिक महत्व है।
धन लक्ष्मी पोटली बनाने के लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती। इसे घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसके लिए ये चीजें रख लें:
लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा
5 या 7 कौड़ियां
कुछ कमलगट्टे
हल्दी की एक गांठ
थोड़े से साबुत चावल यानी अक्षत
एक सिक्का
एक छोटी सुपारी
लाल मौली या कलावा
आप अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार सामग्री में बदलाव भी कर सकते हैं।
सबसे पहले लाल या पीले कपड़े को साफ जगह पर बिछा लें। अब इसके बीच में कौड़ियां, कमलगट्टे, हल्दी की गांठ, अक्षत, सुपारी और सिक्का रखें। इसके बाद कपड़े के चारों कोनों को ऊपर की तरफ इकट्ठा करें और लाल मौली या कलावे से अच्छी तरह बांध दें। इस तरह आपकी धन लक्ष्मी पोटली तैयार हो जाएगी।
धार्मिक मान्यताओं में कौड़ी को मां लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है। कमलगट्टे का संबंध कमल के फूल और देवी लक्ष्मी की पूजा से है। हल्दी को शुभता और अक्षत को पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। वहीं सिक्का धन-संपन्नता का प्रतीक है। इन चीजों को पोटली में रखने का उद्देश्य पूजा में मंगलकामना और श्रद्धा व्यक्त करना है।
धनतेरस या दिवाली के दिन स्नान के बाद पूजा स्थल की सफाई करें। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के साथ पोटली को भी पूजा में शामिल करें। उस पर रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें। इसके बाद मां लक्ष्मी से परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।
पूजा पूरी होने के बाद पोटली को अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा घर, अलमारी या तिजोरी में रख सकते हैं। इसे साफ और सुरक्षित स्थान पर रखना उचित माना जाता है।