ऐसे माता-पिता होते हैं अपने बच्चों के दुश्मन समान, जो खराब कर देते हैं उनका भविष्य
Chanakya Niti:कई बार माता-पिता की कुछ गलतियां बच्चों का भविष्य खराब कर देती है। ऐसे पैरेंट्स को आचार्य चाणक्य बच्चों के दुश्मन मानते थे। यहां जानिए उन गलतियों के बारे में।
- Written By: सीमा कुमारी
कैसे माता-पिता बच्चों के लिए शत्रु के समान होते हैं (सौ.सोशल मीडिया)
Chanakya Niti For Enemy: आमतौर पर लोगों से यह कहते जरुर सुना है कि बच्चे के पहले गुरु यानी शिक्षक उसके माना पिता होते है। बच्चों के सर्वांगीण विकास में माता-पिता की अहम भूमिका होती है। उसे अच्छे संस्कार से लेकर जीवन जीने के कई कायदे माता-पिता ही सिखाते है।
वहीं, प्रसिद्ध शिक्षक, दार्शनिक, अर्थशास्त्री आचार्य चाणक्य का भी यही मानना था, कि बच्चे की पहली शिक्षा उसके घर से शुरु होती है, जो कि उसे उसके माता-पिता द्वारा दी जाती है। कहते है माता-पिता के दिए संस्कार पूरी जिंदगी उसके साथ चलते हैं। यही संस्कार व शिक्षा उसकी पर्सनालिटी का निर्माण करने में मदद करती है।
लेकिन आपको बता दें कि आचार्य चाणक्य ने माता-पिता के कुछ अवगुण के बारे में भी उल्लेख किया है जो उनके बच्चों के जीवन में दुश्मन के समान भूमिका निभाते है। अपने इन अवगुणों के चलते वे अपने ही हाथों से अपनी संतान का भविष्य अंधकार में डाल देते है।
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ऐसे में आज शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर आइए जानते हैं माता-पिता में ऐसे कौन-कौन से अवगुण हैं जिनका जिक्र चाणक्य नीति में किया गया है। जो बच्चों के सर्वांगीण विकास में वाधा उत्पन्न करती है।
कैसे माता-पिता बच्चों के लिए शत्रु के समान होते हैं जानिए :
बच्चों को शिक्षा पाने का अधिकार
आचार्य चाणक्य का मानना है कि, जो माता-पिता अपने बच्चों को शिक्षा नहीं देते वह उनके लिए शत्रु के समान है। क्योंकि अशिक्षित बच्चा कभी विद्वानों के बीच नहीं बैठ पाता और यदि बैठ भी जाए तो उसे अपमान सहना पड़ता है। इसलिए बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा बेहद ही जरूरी है।
ज्यादा लाड़-प्यार से न बिगाड़ें
आचार्य चाणक्य का मानना था कि बच्चों को ज्यादा प्यार और दुलार भी नहीं करना चाहिए। इससे बच्चे जिद्दी बनते हैं और उन्हें हर चीज अपने मन की करने की आदत हो जाती है। आगे चलकर यही आदत उनको निरंकुश यानी मनमौजी बनाती है।
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ये मनमौजी न बच्चों के लिए सही होती है और न ही उनके माता पिता को कोई सुख दे सकती है। इसलिए बच्चों को उनकी गलती पर डांटना भी बेहद जरूरी है। ताकि वे सही और गलत का भेद समझ सकें। इससे उनमें गुणों का विकास होता है।
