क्या कुंवारी कन्याएं शादी से पहले रख सकती है करवा चौथ व्रत, जानिए क्या होते है नियम

Karwa Chauth Vrat Niyam: धार्मिक जानकारों के मुताबिक, कुंवारी कन्याएं भी अच्छे पति की इच्छा से यह व्रत रख सकती है। करवा चौथ का व्रत सब तरह के मनोरथ पूर्ण करने वाला है तो यह शुभ परिणाम दिलाता है।
कुंवारी कन्याओं के लिए व्रत के नियम
कुंवारी कन्याओं के लिए व्रत के नियम (सौ. सोशल मीडिया)
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Karwa Chauth Vrat: सुहागिन महिलाओं द्वारा करवा चौथ का व्रत 10 अक्टूबर को रखा जाने वाला है। यह व्रत पति की लंबी उम्र और मंगल कामना के लिए किया जाता है। हर कोई मानते है कि, करवा चौथ का व्रत केवल शादीशुदा महिलाओं के लिए होता है लेकिन धार्मिक जानकारों के मुताबिक, कुंवारी कन्याएं भी अच्छे पति की इच्छा से यह व्रत रख सकती है। करवा चौथ का व्रत सब तरह के मनोरथ पूर्ण करने वाला है तो यह शुभ परिणाम दिलाता है। कुंवारी कन्याओं के लिए करवा चौथ के नियम अलग होते है जिसके जरिए वे व्रत को पूरा करती है। कहा जाता है कि जिन लड़कियों के विवाह में बाधा आती है या जिन्हें मनपसंद जीवनसाथी की कामना होती है, वे करवा चौथ का व्रत रख सकती है।

क्या होते है कुंवारी कन्याओं के लिए व्रत के नियम

यहां पर कुंवारी कन्याओं द्वारा करवा चौथ का व्रत किस तरह से रखा जाता है और इसके नियम क्या है चलिए जानते है...

1- कुंवारी कन्याओं के लिए करवा चौथ का व्रत रखने की विधि सबसे अलग होती है। व्रत को हल्का रखना और फलाहारी रखना ज्यादा उचित होता है. फल, खजूर, दूध और हल्का खाना रखकर भी व्रत का महत्व पूरा होता है।

2- सुहागन महिलाओं की तरह, कुंवारी कन्याओं के लिए पूरे दिन पानी या भोजन न लेने की बाध्यता नहीं है। आप फल, दूध या हल्का भोजन कर सकती हैं। व्रत का मुख्य उद्देश्य अपने मन और आत्मा को शुद्ध करना है।

3- माना जाता है कि, अविवाहित लड़कियों को करवा माता, भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की पूजा करनी चाहिए। पहले माता करवा की कथा सुनी जाती है और फिर पूजा का समय आता है. यह पूजा परिवार में सुख-शांति और रिश्तों में मधुरता लाती है।

4- अविवाहित लड़कियों के लिए नियम कहते है कि, व्रत के दौरान फलाहार कर सकती हैं और एक बार पानी पी सकती हैं, उन्हें थाली घुमाने या करवा बदलने की रस्म नहीं करनी होती।16 श्रृंगार आवश्यक नहीं है और सुहाग की वस्तुएं उपहार में नहीं लेनी चाहिए।

5- नियम के अनुसार कहा जाता है कि, करवा चौथ व्रत के दौरान विवाहित महिलाएं व्रत के अंत में चंद्रमा को अर्घ्य देकर पारण करती हैं, लेकिन अविवाहित कन्याओं को तारों को अर्घ्य देना चाहिए। बिना छन्नी के तारों को अर्घ्य देकर अपना व्रत खोलना चाहिए।

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