होलिका दहन में गलती से भी आम, पीपल और इन पेड़ों की लकड़ियां न जलाएं, वरना बर्बादी पक्की!
Holika Dahan Wood Rules: होलिका दहन में कुछ पवित्र पेड़ों की लकड़ी जलाना वर्जित माना गया है। मान्यता है कि आम और पीपल जैसे वृक्षों की लकड़ी उपयोग करने से अशुभ फल मिल सकते हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
होलिका दहन (सौ.सोशल मीडिया)
Vastu Tips For Holika Dahan: भक्त प्रहलाद की अटूट भक्ति और होलिका के अंत के उपलक्ष्य में होलिका दहन का त्योहार मनाया जाता है। फाल्गुन पूर्णिमा की रात को लोग मिलकर होलिका जलाते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं कि उनके जीवन से दुख, तनाव और बुरी ऊर्जा दूर हो जाए। साल 2026 में होलिका दहन 3 मार्च 2026, मंगलवार को अर्धरात्रि में किया जाएगा।
धार्मिक मान्यता है कि होलिका दहन के दिन जलाई गई अग्नि मन की नकारात्मक सोच जैसे गुस्सा, जलन और अहंकार को खत्म करता है।
इसलिए होलिका दहन करते समय सही सामग्री का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी माना जाता है। शास्त्रों में कुछ पेड़ों की लकड़ी को जलाने से मना किया गया है, क्योंकि उन्हें पवित्र माना जाता है।
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होलिका दहन में किन पेड़ों की लकड़ियां जलाने की मनाही
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पीपल
होलिका दहन के लिए लकड़ियों का चुनाव करते समय कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। ऐसे में होलिका दहन के लिए लकड़ियों के लिए पीपल वृक्ष के लकड़ियों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
पीपल को हिंदू धर्म में देव वृक्ष माना जाता है। श्रीमद्भगवद्गीता में स्वयं भगवान कृष्ण ने कहा है कि वृक्षों में मैं पीपल हूं। पीपल में ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ-साथ पितरों का वास माना जाता है। इसे जलाने से पितृ दोष लगता है और वंश वृद्धि में बाधा आ सकती है।
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बरगद
इसके अलावा, बरगद के पेड़ की लकड़ियों का इस्तेमाल भी होलिका दहन के लिए नहीं करना चाहिए। बरगद के पेड़ को दीर्घायु व स्थिरता का प्रतीक बताया गया है। वट सावित्री जैसे व्रतों में इसकी पूजा की जाती है। इसकी लकड़ियां जलाने से परिवार की सुख-शांति भंग हो सकती है। इसे शिव का स्वरूप माना जाता है, अतः इसे अग्नि के हवाले करना वर्जित है।
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शमी
होलिका दहन के लिए शमी पेड़ की लकड़ियों का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए। शमी का पेड़ शनि देव और भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय है। शमी की लकड़ी का उपयोग यज्ञ की समिधा के रूप में किया जाता है न कि कूड़े-कचरे के साथ जलाने के लिए। इसे जलाने से शनि देव का प्रकोप झेलना पड़ सकता है और घर में आर्थिक तंगी आ सकती है।
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आम
भले ही आम की लकड़ियों का उपयोग हवन में किया जाता है लेकिन होलिका दहन के समय हरी भरी आम की टहनियां काटना वर्जित है। फाल्गुन मास में आम के पेड़ों पर मंजर आने लगते हैं। इस समय पेड़ को काटना उसकी संतान को नष्ट करने जैसा माना जाता है।
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नीम और केला
नीम का उपयोग औषधि के रूप में होता है और केले को भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है। इन दोनों की लकड़ियों को होलिका की अग्नि में जलाना अशुभ माना गया है।
