होलिका दहन(सौ. AI)
Holika Dahan Exact Muhurat: सनातन धर्म में होली केवल एक त्योहार ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवंत पहचान भी है। यह ऐसा उत्सव है जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
होलिका दहन आज 2 मार्च को ही किया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, भद्रा पुच्छ में होलिका दहन किया जा सकता है। हालांकि, अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त के समय के अनुसार होलिका दहन का शुभ मुहूर्त थोड़ा अलग हो सकता है।
यह दिन नकारात्मकता को दूर करने और सकारात्मकता का स्वागत करने का है। वहीं, इस दिन को लेकर कई सारे नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन सभी को करना चाहिए। आइए उन नियमों को जानते हैं।
होलिका दहन की रात को शास्त्रों में अत्यंत प्रभावशाली और संवेदनशील माना गया है। इस रात की गई एक छोटी सी भूल आपकी सुख-समृद्धि को प्रभावित कर सकती है।
ज्योतिषयों के अनुसार, होलिका दहन की रात भूलकर भी किसी को भी पैसा उधार देने या लेने से बचें। माना जाता है कि ऐसा करने से घर की बरकत रुक जाती है और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, होलिका दहन के समय सफेद रंग के कपड़े पहनने से नकारात्मक शक्तियां जल्दी आकर्षित होती हैं। इस दिन गहरे रंगों के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
कहा जाता है कि, होलिका दहन के दिन महिलाओं को पूजा के समय अपने बाल खुले नहीं रखने चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खुले बाल नकारात्मक ऊर्जा को सोख सकते हैं, इसलिए बाल बांधकर ही पूजा में शामिल हों।
होलिका दहन के इस पवित्र रात में मांस, मदिरा या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन बिल्कुल न करें। यह न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी अशुभ माना गया है।
जिन महिलाओं की शादी के बाद पहली होली है, उन्हें जलती हुई होलिका देखने की मनाही होती है। माना जाता है कि इससे वैवाहिक जीवन में कलह या दुर्भाग्य आ सकता है।
होलिका दहन की रात अनजान व्यक्ति या किसी दूसरे के घर का भोजन करने से बचना चाहिए। विशेष रूप से बाहर खुले में खड़े होकर मीठी चीजें खाने से परहेज करें।
इस दिन किसी भी महिला या बड़े-बुजुर्ग का अपमान न करें। क्रोध और अपशब्दों का प्रयोग करने से घर की शांति भंग होती है और ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है।
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होलिका दहन के बाद उसकी पवित्र राख को घर के मुख्य द्वार पर छिड़कना और सात बार परिक्रमा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।