Phulera: हरतालिका तीज पर शिवलिंग के ऊपर क्यों बांधा जाता है फुलेरा? 5 फूलों की मालाओं में छिपी है खास मान्यता

Hartalika Teej Phulera :हरतालिका तीज पर शिवलिंग के ऊपर फुलेरा बांधने की खास परंपरा है। जानें 5 फूलों की मालाओं से बने फुलेरे का धार्मिक महत्व और इससे जुड़ी शिव-पार्वती की मान्यता।
Shivling Par Phoolon Ki Mala
क्या होता है फुलेरा?(सौ.सोशल मीडिया)
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Shivling Par Phoolon Ki Mala: सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं द्वारा मनाया जाने वाला हरतालिका तीज का इस बार 14 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। यह व्रत हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को रखा जाता है।

महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए बेहद खास होता है। दिन भर का निर्जला उपवास और रात में चार प्रहर की पूजा के साथ इस दिन एक खास परंपरा निभाई जाती है- वह है पूजा की चौकी के ऊपर 'फुलेरा' (फुलहरा) बांधना।

लोक मान्यताओं के अनुसार, फुलेरा के बिना हरतालिका तीज की पूजा पूरी नहीं मानी जाती। फुलेरा क्या है और हरतालिका तीज की पूजा में फुलेरा क्यों है इतना खास? यहां जानिए

क्या होता है फुलेरा?

फुलेरा फूलों, लताओं और पत्तियों से तैयार किया गया एक सुंदर छत्र या मंडप होता है, जिसे बालू/मिट्टी से बने पार्थिव शिवलिंग के ठीक ऊपर बांधा जाता है। सनातन धर्म में इसे महादेव और देवी पार्वती के विवाह मंडप और उनकी दिव्य छत्रछाया का प्रतीक माना जाता है।

महादेव की पांच पुत्रियों से जुड़ी मान्यता

ज्योतिषियों के अनुसार, हरतालिका तीज में पूजा करते समय फुलेरा का काफी महत्व है। पूजा के दौरान भगवान शिव के ऊपर जलधारा की जगह फुलेरा बांधा जाता है।

फुलेरा को पांच तरह के फूलों से बनाया जाता है। फुलेरा में बांधी जाने वाली 5 फूलों की मालाएं भगवान शंकर की पांच पुत्रियों जया, विषहरा, शामिलबारी, देव और दोतली का प्रतीक है।

सबसे पहले किसने क्या था हरतालिका तीज व्रत?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां पार्वती ने सबसे पहले हरतालिका तीज व्रत किया था। इस व्रत के दौरान मां पार्वती ने अन्न और जल का त्याग किया था। मत पार्वती के इस कठिन तप से प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ ने उन्हें दर्शन दिए और उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

तभी से मनचाहे वर की कामना और अखंड सौभाग्य के लिए महिलाएं हरतालिका तीज का व्रत रखती है।

हरतालिका तीज व्रत का महत्व

हरतालिका तीज का व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक होता है। यह व्रत निर्जला रखा जाता है, यानी इस दिन पानी और भोजन दोनों का त्याग किया जाता है। हरतालिका तीज व्रत 24 घंटे तक रखा जाता है। 24 घंटे पूरे होने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग को अखंड बनाए रखने और अविवाहित युवतियां मनचाहा वर पाने के लिए करती हैं। यह व्रत महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए करती हैं। इस दिन महिलाएं गौरी-शंकर की पूजा करती हैं और निर्जला व्रत का पालन करती हैं।

कहते हैं कि हरतालिका तीज व्रत करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। महिलाओं को अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है।

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