Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी
  • फैक्ट चेक
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो

  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

अगर दुर्योधन ने श्रीकृष्ण को चुन लिया होता, तो क्या पांडव हार जाते? जानिए धर्म का असली रहस्य

Mahabharat Stories: अक्सर यह सवाल उठता है अगर दुर्योधन ने भगवान श्रीकृष्ण से उनकी नारायणी सेना के बजाय स्वयं श्रीकृष्ण का साथ मांगा होता तो क्या कौरवों की जीत होती। इसके पीछे एक साफ और आसान जवाब है।

  • Written By: सिमरन सिंह
Updated On: Feb 25, 2026 | 04:54 PM

Duryodhan and Shri Krishna (Source. Pinterest)

Follow Us
Close
Follow Us:

Duryodhan and Shri Krishna During Dharm Yudh: महाभारत का युद्ध केवल शस्त्रों का संघर्ष नहीं था, वह धर्म और अधर्म की निर्णायक लड़ाई थी। अक्सर यह सवाल उठता है अगर दुर्योधन ने भगवान श्रीकृष्ण से उनकी नारायणी सेना के बजाय स्वयं श्रीकृष्ण का साथ मांगा होता, तो क्या परिणाम बदल जाता? क्या कौरव विजय प्राप्त कर लेते? यह प्रश्न जितना रोचक है, उतना ही गूढ़ भी।

श्रीकृष्ण किसके पक्ष में थे?

पहले यह समझना जरूरी है कि श्रीकृष्ण का पक्ष क्या था। अर्जुन और दुर्योधन के लिए दो पक्ष थे कौरव और पांडव। लेकिन श्रीकृष्ण के लिए केवल एक ही पक्ष था धर्म। उन्होंने स्वयं शस्त्र न उठाने का वचन दिया था, परंतु यह स्पष्ट था कि वे धर्म की स्थापना के लिए ही उपस्थित थे। यदि दुर्योधन उन्हें अपने पक्ष में मांग भी लेता, तो भी श्रीकृष्ण धर्म के विरुद्ध खड़े नहीं हो सकते थे। अर्थात, वे जहां भी होते, विजय अंततः धर्म की ही होती और उस समय धर्म पांडवों के साथ था।

इतिहास के उदाहरण क्या कहते हैं?

पुराणों और रामायण में भी ऐसे प्रसंग मिलते हैं। प्रजापति दक्ष नारायण के भक्त थे और उन्हें संरक्षण का वचन मिला था। लेकिन जब उन्होंने भगवान शिव का अपमान किया और माता सती ने यज्ञ अग्नि में देह त्यागी, तब स्थिति बदल गई। विष्णु भगवान ने औपचारिक रूप से दक्ष का साथ दिया, परंतु अंततः विजय धर्म की ही हुई। रामायण में अश्वमेध यज्ञ के दौरान एक शिवभक्त राजा ने घोड़ा पकड़ लिया। शिव जी उसके पक्ष में थे, फिर भी अंतिम विजय श्रीराम और धर्म की हुई। इसी प्रकार बाणासुर और श्रीकृष्ण के युद्ध में भी धर्म की स्थापना ही अंतिम परिणाम बनी।

सम्बंधित ख़बरें

सिर्फ लड्डू नहीं, यहां मिलता है नूडल्स-मोमोज का प्रसाद, कोलकाता का ये अनोखा मंदिर देख आप भी रह जाएंगे हैरान

होलिका दहन में गलती से भी आम, पीपल और इन पेड़ों की लकड़ियां न जलाएं, वरना बर्बादी पक्की!

लगने वाला है चांद को ग्रहण, इन गलतियों से दूर रहें, नहीं तो हो सकती है परेशानी

होलिका दहन की राख से करें ये काम, पलट जाएगी किस्मत!

युद्ध से पहले की परिस्थिति

यदि हम स्वयं को युद्ध से ठीक पहले के समय में रखें, तो पांडवों की स्थिति कमजोर दिखती है। कौरवों के पास 11 अक्षौहिणी सेना थी, जबकि पांडवों के पास केवल 7। भीष्म, द्रोणाचार्य और कवच-कुंडलधारी कर्ण जैसे महायोद्धा कौरव पक्ष में थे। ऐसे में सामान्य बुद्धि कहती है कि कौरवों की विजय निश्चित थी। परंतु हुआ इसके विपरीत। श्रीकृष्ण ने बिना शस्त्र उठाए धर्म की जीत सुनिश्चित की।

ये भी पढ़े: महंगे फूल नहीं, ये 8 अंतरात्मा के फूल चढ़ाइए, तभी पूरी होंगी मनोकामनाएँ! Shri Premanand Ji Maharaj

विजय किसकी होती?

मेरे मत में, यदि दुर्योधन श्रीकृष्ण को अपने पक्ष में भी मांग लेता, तो भी परिणाम नहीं बदलता। श्रीकृष्ण किसी न किसी उपाय से धर्म की ही विजय कराते। ईश्वर की लीला मानव बुद्धि से परे है। महाभारत हमें यही सिखाता है कि अंततः जीत उसी की होती है जो धर्म के मार्ग पर चलता है।

Had duryodhana chosen lord krishna would the pandavas have lost true secret of religion

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Feb 25, 2026 | 04:10 PM

Topics:  

  • Lord Krishna
  • Mahabharat
  • Religion
  • Sanatana Dharma
  • Spiritual

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.