Guru Purnima: गुरू पूर्णिमा 2026 की तिथि को लेकर कंफ्यूज़न ख़त्म, यहां जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त
Guru Purnima Importance: गुरु पूर्णिमा 2026 की तिथि को लेकर यदि आपके मन में भी भ्रम है, तो यहां जानिए सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व और गुरु पूजन का आध्यात्मिक महत्व ।
- Written By: सीमा कुमारी
गुरु शिष्य (सौ.AI)
Guru Purnima Date And Time 2026: वैसे तो हर महीने आने वाली पूर्णिमा का अपना महत्व होता है, लेकिन आषाढ़ माह की पूर्णिमा को सबसे अधिक पुण्यदायी माना गया है। आषाढ़ माह की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहा जाता है। इसे आषाढ़ी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं है कि, इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा के साथ ही आषाढ़ मास का समापन हो जाता है और इसके बाद सावन मास की शुरुआत होती है, जिसे भगवान शिव का अत्यंत प्रिय महीना माना गया है। गुरु पूर्णिमा पर दान -स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। आइए गुरु पूर्णिमा की तिथि और मुहूर्त जानते हैं-
गुरु पूर्णिमा 2026 का शुभ तिथि
गुरु पूर्णिमा का त्योहार गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता की प्रतीक है। पंचांग के अनुसार, यह पर्व हर वर्ष आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस बार आषाढ़ पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई 2026 की शाम 06 बजकर 21 मिनट से आरंभ होगी। पूर्णिमा तिथि का समापन 29 जुलाई 2026 की रात 08 बजकर 07 मिनट पर होगा। ऐसे में गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई को ही मनाई जायेगी ।
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क्या रहने वाला गुरु पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त?
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:17 बजे से सुबह 04:59 बजे तक
- विजय मुहूर्त- दोपहर 02:43 बजे से दोपहर 03:37 बजे तक
- संध्य काल मुहूर्त- शाम 07:14 बजे से रात 08:17 बजे तक
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गुरु पूर्णिमा का क्या है आध्यात्मिक महत्व ?
सनातन धर्म में गुरु पूर्णिमा का बड़ा महत्व बताया गया है। नीचे दिए गए श्लोक का धर्म ग्रथों में बड़ा महत्व बताया गया है।
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः, गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः।
इस श्लोक का अर्थ है ‘गुरु ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु हैं, गुरु ही शंकर हैं, गुरु ही साक्षात परब्रह्म हैं, उन सद्गुरु को प्रणाम।’ यह श्लोक हमें स्पष्ट रूप से बताता है कि हमारे जीवन में गुरुओं का कितना महत्वपूर्ण स्थान होता है। सनातन धर्म में गुरु को भगवान का दर्जा दिया गया है और आषाढ़ शुक्ल पक्ष में आने वाली पूर्णिमा भी गुरुओं को समर्पित की गई है।
बता दें गुरु पूर्णिमा के पर्व को भारत में बड़े ही श्रद्धाभाव के साथ मनाया जाता है। इस दिन शिष्य अपने गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। साथ ही इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस दिन महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। जिन्हें प्रथम गुरु के रूप में माना जाता है।
