Guru Pradosh Vrat:अधिकमास का पहला प्रदोष व्रत गुरुवार को, विधिवत पूजा से महादेव की बरसेगी कृपा
Guru Pradosh Vrat Date 2026: अधिकमास में आने वाला पहला गुरु प्रदोष व्रत इस बार गुरुवार को पड़ रहा है। इस दिन विधिवत रूप से भगवान शिव की पूजा करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान शिव (सौ.AI)
Pradosh Vrat Kab Hai : देवाधिदेव भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत सनातन धर्म में भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। जब प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है, तब इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है और अधिक मास में आने वाला यह व्रत और भी विशेष फलदायी माना जाता है। इस बार अधिक मास में पड़ने वाली प्रदोष व्रत 28 मई गुरुवार के दिन पड़ रही है।
गुरु प्रदोष व्रत का महत्व
धार्मिक ग्रथों में बताया गया है कि, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के दुख, दरिद्रता और बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही गुरु ग्रह से जुड़े दोषों में भी राहत मिलती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
अधिक मास को भगवान विष्णु और शिव दोनों की उपासना के लिए पुण्यदायी समय माना गया है, इसलिए इस दौरान किया गया व्रत और दान कई गुना फल देता है।
सम्बंधित ख़बरें
Nautapa Plants: नौतपा के दिनों में घर ले आएं ये 5 खास पौधे, चमक उठेगी किस्मत
Nautapa 2026: नौतपा में क्यों नहीं खाना चाहिए बैंगन, जानिए स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण कारण
Bakrid Qurbani Rules: बकरीद में कुर्बानी के नियम क्या हैं? जानिए ईद-उल-अजहा से जुड़ी जरूरी बातें
Agni Nakshatram 2026: क्या होता है अग्निनक्षत्रम् दोष, कब होगा खत्म और किन बातों का रखें ख्याल
क्या है अधिकमास प्रदोष व्रत का शुभ समय?
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 28 मई को सुबह 7 बजकर 56 मिनट पर प्रारंभ होगी। इसका समापन 29 मई को सुबह 9 बजकर 50 मिनट पर होगा। चूंकि प्रदोष काल 28 मई की शाम को प्राप्त हो रहा है, इसलिए अधिकमास का पहला प्रदोष व्रत 28 मई, गुरुवार को रखा जाएगा। गुरुवार के दिन पड़ने के कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत भी कहा जाएगा।
कैसे करें प्रदोष व्रत की पूजा ?
- प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- शाम के समय प्रदोष काल में भगवान शिव का अभिषेक करना शुभ माना जाता है।
- इसके लिए आप शिवलिंग पर जल, दूध, गंगाजल, शहद और दही से अभिषेक करें।
- फिर 11 बेलपत्र चढ़ाएं और धतूरा संग सफेद पुष्प अर्पित करें।
- घी का दीपक जलाकर शिव चालीसा पढ़ें।
- गुरु प्रदोष की कथा पढ़ें और अंत में शिव परिवार की आरती कर लें।
ये भी पढ़ें-Nautapa Plants: नौतपा के दिनों में घर ले आएं ये 5 खास पौधे, चमक उठेगी किस्मत
शिवजी की आरती : ॐ जय शिव ओंकारा
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव…॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव…॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव…॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव…॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव…॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव…॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव…॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव…॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव…॥
