

Guru Pradosh Vrat 2026 Puja Vidhi Upay: हिंदू पंचांग में त्रयोदशी तिथि का विशेष महत्व है, जो पूर्ण रूप से भगवान शिव की भक्ति के लिए समर्पित मानी जाती है। हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी पर प्रदोष व्रत रखा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में की गई शिव पूजा से भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। अश्विन मास में पहला प्रदोष व्रत गुरुवार को पड़ रहा है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है।
जब त्रयोदशी तिथि गुरुवार के दिन पड़ती है, तो उसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। अश्विन मास का यह पहला प्रदोष व्रत 8 अक्टूबर 2026, दिन गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन भगवान भोलेनाथ के साथ-साथ देवगुरु बृहस्पति की भी असीम कृपा प्राप्त की जा सकती है। नई दिल्ली के अनुसार, इस दिन शाम को प्रदोष पूजा का शुभ समय शाम 05:59 बजे से शुरू होकर रात 08:27 बजे तक रहेगा।
गुरुवार को प्रदोष व्रत होने की वजह से यह दिन करियर, व्यापार, शिक्षा और वैवाहिक जीवन की समस्याओं को दूर करने के लिए बेहद खास माना गया है। यदि आपकी कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर है या विवाह में लगातार अड़चनें आ रही हैं, तो इस दिन की गई विशेष पूजा-अर्चना से इन सभी दोषों से छुटकारा मिल सकता है।
इस पावन दिन संध्या काल (प्रदोष काल) में स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पास के शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें। पूजा में शिवजी को पीले फूल, बेसन के लड्डू या चने की दाल चढ़ाएं। इसके साथ ही पूजा के दौरान "ॐ नमः शिवाय" मंत्र के साथ-साथ "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
मान्यता है कि गुरु प्रदोष के दिन राशि अनुसार और विधि-विधान से किए गए इन उपायों से आर्थिक तंगी दूर होती है। जो लोग लंबे समय से नौकरी, व्यापार या विवाह की समस्याओं से जूझ रहे हैं, उन्हें इस व्रत और पूजा से सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं। इसलिए इस शुभ मुहूर्त में भगवान शिव और देवगुरु बृहस्पति का ध्यान कर अपनी मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना जरूर करें।