गुड़ी पड़वा(सौ.सोशल मीडिया)
Gudi Padwa Rules: गुड़ी पड़वा मराठी हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला एक मुख्य त्योहार है जो हर साल चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन मनाया जाता है। गुड़ी पड़वा मराठी कैलेंडर के नए साल की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
इस दिन घर के आंगन में फहराई जाने वाली गुड़ी यानी विजय पताका केवल एक ध्वज मात्र नहीं है, बल्कि यह नकारात्मकता पर सकारात्मकता की जीत और आने वाले सुनहरे समय का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में आइए जान लेते हैं, गुड़ी पड़वा के दिन विजय पताका लगाते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, गुड़ी या विजय पताका को बनाने के लिए घर के मुख्य द्वार या खिड़की के पास बनाना शुभ बताया गया है। अगर आप इसे ऊंचाई पर बनाते है तो शुभ माना जाता है, ताकि यह दूर से ही दिखाई दे और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करे।
गुड़ी को बनाने के लिए एक बांस की लकड़ी पर साड़ी, कलश और नीम-पत्तों की जरूरत होती है। यह सजावट जीवन में खुशहाली और स्वास्थ्य का प्रतीक मानी जाती है।
वास्तु विशेषज्ञ के अनुसार, गुड़ी को भूलकर भी दक्षिण दिशा में नहीं लगाना चाहिए। क्योंकि दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है, जो नकारात्मक ऊर्जा का संकेत देती है। कहा जाता है कि, इस दिशा में गुड़ी लगाने से घर में सकारात्मकता की जगह नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने लगती है। जिसके वजह से गृह कलेश और परेशानियां बढ़ सकती है।
वास्तु विशेषज्ञ बताते है कि, गुड़ी को हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में लगाना सबसे शुभ बताया गया है। पूर्व दिशा सूर्य देव की दिशा होती है, जो ऊर्जा, प्रकाश और नई शुरुआत का प्रतीक है। वहीं उत्तर दिशा धन और समृद्धि से जुड़ी मानी जाती है। कहते है इन दिशाओं में गुड़ी लगाने से घर में खुशहाली, सफलता और सौभाग्य का प्रवेश होता है।
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