गुड़ी पड़वा की विजय पताका भूल से भी इस दिशा में न लगाएं, जानिए इस त्यौहार के सही नियम
Gudi Padwa Festival Importance: गुड़ी पड़वा पर विजय पताका लगाने के दौरान अक्सर लोग गलती कर देते हैं। जानिए इस त्यौहार में सही दिशा और नियम, ताकि पूजा और शुभकामनाएँ पूरी तरह फलित हों।
- Written By: सीमा कुमारी
गुड़ी पड़वा(सौ.सोशल मीडिया)
Gudi Padwa Rules: गुड़ी पड़वा मराठी हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला एक मुख्य त्योहार है जो हर साल चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन मनाया जाता है। गुड़ी पड़वा मराठी कैलेंडर के नए साल की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
इस दिन घर के आंगन में फहराई जाने वाली गुड़ी यानी विजय पताका केवल एक ध्वज मात्र नहीं है, बल्कि यह नकारात्मकता पर सकारात्मकता की जीत और आने वाले सुनहरे समय का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में आइए जान लेते हैं, गुड़ी पड़वा के दिन विजय पताका लगाते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
गुड़ी बनाते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
मुख्य द्वार या खिड़की के पास
वास्तु शास्त्र के अनुसार, गुड़ी या विजय पताका को बनाने के लिए घर के मुख्य द्वार या खिड़की के पास बनाना शुभ बताया गया है। अगर आप इसे ऊंचाई पर बनाते है तो शुभ माना जाता है, ताकि यह दूर से ही दिखाई दे और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करे।
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गुड़ी को बनाने के लिए एक बांस की लकड़ी पर साड़ी, कलश और नीम-पत्तों की जरूरत होती है। यह सजावट जीवन में खुशहाली और स्वास्थ्य का प्रतीक मानी जाती है।
दक्षिण दिशा में बनाना अशुभ
वास्तु विशेषज्ञ के अनुसार, गुड़ी को भूलकर भी दक्षिण दिशा में नहीं लगाना चाहिए। क्योंकि दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है, जो नकारात्मक ऊर्जा का संकेत देती है। कहा जाता है कि, इस दिशा में गुड़ी लगाने से घर में सकारात्मकता की जगह नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने लगती है। जिसके वजह से गृह कलेश और परेशानियां बढ़ सकती है।
पूर्व या उत्तर दिशा में लगाना शुभ
वास्तु विशेषज्ञ बताते है कि, गुड़ी को हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में लगाना सबसे शुभ बताया गया है। पूर्व दिशा सूर्य देव की दिशा होती है, जो ऊर्जा, प्रकाश और नई शुरुआत का प्रतीक है। वहीं उत्तर दिशा धन और समृद्धि से जुड़ी मानी जाती है। कहते है इन दिशाओं में गुड़ी लगाने से घर में खुशहाली, सफलता और सौभाग्य का प्रवेश होता है।
गुड़ी बनाने के लिए सामग्री
- एक डंडा
- रेशमी साड़ी या चुनरी
- पीले रंग का कपड़ा
- फल
- फूल
- फूलों की माला
- कड़वे नीम के पांच पत्ते
- आम के पांच पत्ते
- रंगोली
- पाट
- लोटा या गिलास
- प्रसाद और पूजा सामग्री।
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गुड़ी कैसे बनाएं गुड़ी
- गुड़ी के लिए लकड़ी का एक डंडा लें।
- डंडा को साफ धो लें और उसके उपर रेशमी कपड़ा या साड़ी बांधें।
- एक नीम की टहली, आम के पांच पत्ते, एक फूलों की माला, एक शक्कर की माला को लगाएं और
- उसके उपर से तांबा पितल या चांदी का लोटा या गिलास रखें।
- जिस स्थान पर गुड़ी लगानी हो उस स्थान को साफ और स्वच्छ कर लेना चाहिए।
- गुड़ी रखने वाले स्थान पर पहले रंगोली बनाई जाती है, वहां एक पाट रखा जाता है और उसके ऊपय
- वह दंड रखा जाता है।
- तैयार गुड़ी को घर के दरवाजे पर, ऊंची छत पर या गैलरी में यानि किसी ऊँचे स्थान पर लगाई जाती
- है।
- गुड़ी को अच्छी तरह से बांधकर और उस पर सुगंध, फूल और अगरबत्ती लगाकर गुड़ी की पूजा
- करनी चाहिए।
- अगरबत्ती लगाने के बाद दीपक से गुड़ी की पूजा करते हैं।
- फिर दूध-चीनी, पेड़े का प्रसाद अर्पित करना चाहिए।
- दोपहर के समय गुड़ी को मीठा प्रसाद चढ़ाना चाहिए। इस दिन परंपरा के अनुसार श्रीखंड-पुरी या
- पूरनपोली का भोग लगाया जाता है।
- शाम को सूर्यास्त के समय हल्दी-कुमकुम, फूल, अक्षत आदि अर्पित करके गुड़ी को उतारा जाता है।
- इस दिन सभी हिन्दू एक-दूसरे को नववर्ष की बधाई देते हैं।
