मराठी नववर्ष( सौ.सोशल मीडिया)
Gudi Padwa Kab Hai: गुरुवार, 19 मार्च से हिंदू नववर्ष की शुरुआत हो रही है। इस दिन गुड़ी पड़वा का पर्व भी मनाया जाएगा। यह पर्व हिंदू नववर्ष का पहला त्योहार है, जो महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक और खासतौर पर कोंकणी और मराठी समुदाय के लोगों द्वारा बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
यह चैत्र मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि पर पड़ता है और नए साल की शुरुआत, विजय, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इस दिन घर में गुड़ी लगाना, तेल स्नान करना, नए वस्त्र पहनना और पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि गुड़ी पड़वा पर किए गए कार्य पूरे वर्ष सुख-समृद्धि और शांति लाते हैं।
गुड़ी पड़वा का त्योहार हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र महीने के पहले दिन यानी शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 19 मार्च को मनाया जाएगा। इसी दिन से मराठी शक संवत 1948 की शुरुआत होगी।
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 19 मार्च 2026, सुबह 06:52 बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त: 20 मार्च 2026, सुबह 04:52 बजे
कर्नाटक में इस दिन को युगादी, जबकि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में उगादी के रूप में मनाया जाता है। इन सभी त्योहारों का अर्थ नए साल की शुरुआत से जुड़ा हुआ है।
गुड़ी पड़वा हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है, जो चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। आध्यात्मिक एवं धार्मिक दोनों रूप से गुड़ी पड़वा को बहुत शुभ दिन माना गया है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की शुरुआत की थी । इसके अलावा, यह दिन नए साल, नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। महाराष्ट्र में लोग घर के बाहर गुड़ी लगाकर भगवान से सुख-समृद्धि और सफलता की कामना करते है।
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गुड़ी पड़वा के शुभ अवसर पर लोग अपने घरों की विशेष साफ-सफाई करते हैं और उसे रंगोली, फूलों की मालाओं से सुंदर रूप से सजाते है। घर के मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों से बना तोरण बंधते है। हिन्दू धर्म में घर के मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों से बना तोरण बांधना शुभ होता है।
इस दिन विभिन्न पारंपरिक पाक पकवान भी बनाए जाते है। आंगन या घर के बाहर गुड़ी यानी ध्वज स्थापित किया जाता है, जिसमें पात्र पर स्वस्तिक बनाकर उस पर रेशमी वस्त्र लपेटा जाता है। साथ ही सुबह तेल लगाकर स्नान करने और गुड़ के साथ नीम की कोपल खाने की परंपरा भी स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।