गणगौर व्रत 2025: कब है, क्यों मनाया जाता है और कैसे करें पूजा
सनातन धर्म में गणगौर व्रत का बड़ा महत्व है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से महिलाओं को अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। भगवान शिव जैसा पति प्राप्त करने के लिए अविवाहित कन्याएं भी यह व्रत करती है।
- Written By: सीमा कुमारी
गणगौर व्रत (सौ.सोशल मीडिया)
Gangaur Vrat 2025 :भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित गणगौर व्रत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली तृतीया तिथि को रखा जाता है। इस वर्ष गणगौर व्रत 31 मार्च को रखा जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा चली आ रही है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें, गणगौर में गण का अर्थ है भगवान शिव और गौर का अर्थ है माता गौरी यानी पार्वती जी। परंपरा के अनुसार, विवाहित महिलायें गणगौर के व्रत को अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए रखती है। वहीं, अविवाहित कन्यायें इस व्रत को सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए रखती है, तो ऐसे में आइए जानते हैं गणगौर व्रत कब है। साथ ही जानें व्रत की तारीख और महत्व।
कब है गणगौर व्रत 2025?
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पंचांग के अनुसार, इस वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 31 मार्च सुबह के 9 बजकर 11 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 1 अप्रैल सुबह 5 बजकर 42 मिनट पर होगा। उदयातिथि को देखते हुए इस वर्ष गणगौर व्रत 31 मार्च को रखा जाएगा।
गणगौर पूजा विधि
गणगौर व्रत के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनना चाहिए। इसके बाद, मिट्टी से भगवान शिव और माता गौरी की मूर्तियाँ बनाकर उन्हें सुंदर वस्त्र पहनाने चाहिए।
इसके पश्चात, विधिपूर्वक भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान माता पार्वती को श्रृंगार का सामान अर्पित करना चाहिए।
भगवान शिव और माता पार्वती को चंदन, अक्षत, रोली, और कुमकुम लगाना चाहिए। इसके साथ ही, उन्हें दूर्वा चढ़ानी चाहिए।
भगवान शिव और माता पार्वती के समक्ष धूप और दीप जलाना चाहिए। उन्हें चूरमे का भोग भी अर्पित करना चाहिए।
एक थाली में चांदी का सिक्का, सुपारी, पान, दूध, दही, गंगाजल, हल्दी, कुमकुम, और दूर्वा डालकर सुहाग जल तैयार करें।
फिर, दूर्वा से इस सुहाग जल को भगवान शिव और माता पार्वती पर छिड़कें, और अंत में इसे घर के सदस्यों पर भी छिड़कें।
गणगौर व्रत का महत्व
सनातन धर्म में गणगौर व्रत का बड़ा महत्व है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से महिलाओं को अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। भगवान शिव जैसा पति प्राप्त करने के लिए अविवाहित कन्याएं भी यह व्रत करती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव के साथ सुहागन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देने के लिए भ्रमण करती है। महिलाएं परिवार में सुख-समृद्धि और सुहाग की रक्षा की कामना करते हुए पूजा करती है।
