Ganesh Visarjan 2026: अनंत चतुर्दशी के दिन ही क्यों किया जाता है गणपति विसर्जन? जानें वजह

Ganpati Visarjan On Anant Chaturdashi Reason: अनंत चतुर्दशी के दिन ही गणपति विसर्जन क्यों किया जाता है? जानें इस तिथि का धार्मिक महत्व, गणेश उत्सव के समापन और विसर्जन से जुड़ी मान्यताएं।
Ganesh visarjan anant chaturdashi 2026 reason.
गणेश चतुर्दशी फोटो.सोशल मीडिया
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Anant Chaturdashi Ganesh Visarjan: गणेश चतुर्थी के साथ शुरू हुआ 10 दिनों का गणेश उत्सव अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त हो जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में भक्त ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ गणपति बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन करते हैं।

लेकिन क्या आपको पता है कि गणपति विसर्जन के लिए अनंत चतुर्दशी का दिन ही क्यों निर्धारित है? इसके पीछे धार्मिक मान्यता के साथ-साथ एक गहरा आध्यात्मिक संदेश भी जुड़ा है।

अनंत चतुर्दशी पर ही क्यों किया जाता है गणपति विसर्जन?

हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी कहा जाता है। गणेश चतुर्थी पर गणपति बप्पा की स्थापना के बाद कई जगहों पर 10 दिनों तक पूजा-अर्चना की जाती है और अनंत चतुर्दशी को गणेश उत्सव का समापन दिवस होता है।

अनंत चतुर्दशी का संबंध भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप से है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और कई लोग अनंत सूत्र धारण करते हैं।

विसर्जन से जुड़ा है खास संदेश

गणपति विसर्जन केवल भगवान गणेश की प्रतिमा को जल में प्रवाहित करने की परंपरा नहीं है। इसके पीछे जीवन और प्रकृति से जुड़ा एक गहरा संदेश भी दिया जाता है।

पारंपरिक रूप से गणपति की प्रतिमा मिट्टी से बनाई जाती है। स्थापना के बाद इसी प्रतिमा में गणपति के स्वरूप की पूजा की जाती है और उत्सव पूरा होने के बाद प्रतिमा का विसर्जन कर उसे फिर से प्रकृति में विलीन कर दिया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया जीवन-मृत्यु के चक्र को दर्शाती है। गणेश उत्सव मनाना और फिर गणपति की प्रतिमा का विसर्जन जन्म, जीवन और फिर प्रकृति में लौटने के चक्र का प्रतीक है।

यानी विसर्जन यह संदेश देता है कि संसार में कोई भी भौतिक रूप से स्थायी नहीं है। प्रकृति से आई हर चीज को अंत में प्रकृति में ही मिल जाना है।

क्या है गणपति विसर्जन की कहानी

माना जाता है कि जब भक्त बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन करते हैं, तो भगवान गणेश अपने साथ भक्तों की दुख, परेशानियां और नकारात्मक ऊर्जा भी ले जाते हैं। इसीलिए विसर्जन को बप्पा की विदाई के साथ-साथ जीवन से परेशानियों को दूर करने का प्रतीक भी माना जाता है।

महर्षि वेद व्यास की कथा

एक प्रचलित कथा के अनुसार, जब महर्षि वेदव्यास भगवान गणेश को महाभारत की कथा सुना रहे थे, तब गणेश जी लगातार 10 दिनों तक बिना रुके उसे लिखते रहे। लगातार लिखने के कारण उनके शरीर का तापमान बढ़ गया। उन्हें ठंडक देने के लिए महर्षि वेदव्यास ने उन्हें एक सरोवर में स्नान कराया। मान्यता है कि यह दिन अनंत चतुर्दशी का था। इसी कथा को गणेश चतुर्थी के बाद गणपति विसर्जन से जोड़ा जाता है।

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2026 में कब है अनंत चतुर्दशी?

साल 2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को है। इस दिन गणपति बप्पा की विसर्जन के साथ कई जगहों पर गणेश उत्सव का समापन होगा। विसर्जन के समय भक्त 'गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ' के जयकारे लगाते हैं।

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