भारत में यहां ‘एक गांव, एक गणेश’ के सिद्धांत पर पूजे जाते है गजानन, जानिए इस परंपरा के बारे में

Ganesh Chaturthi 2025: ऐसी ही एक परंपरा गणेशोत्सव से जुड़ी बेलगावी जिले से मिलती है। जहां पर शहर के एक गांव में एक ही गणपति बप्पा विराजे जाते है।
‘एक गांव, एक गणेश’ के सिद्धांत पर पूजे जाते है गजानन
‘एक गांव, एक गणेश’ के सिद्धांत पर पूजे जाते है गजानन (सौ. सोशल मीडिया)
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Ganesh Utsav 2025: गणेशोत्सव की शुरूआत गणेश चतुर्थी 27 अगस्त से होने जा रही है। अब 10 दिनों में बप्पा के जयकारे लगते रहेंगे तो वहीं पर 6 सितंबर तक गणेश अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी। गणेश उत्सव का उत्साह महाराष्ट्र से लेकर कई राज्यों में देखने के लिए मिलता है। गणेशोत्सव को लेकर जहां पर घरों में तैयारियां और पंडाल सजने लगे है तो वहीं पर कई परंपराएं इस दौरान निभाई जाएगी।

ऐसी ही एक परंपरा गणेशोत्सव से जुड़ी बेलगावी जिले से मिलती है। जहां पर शहर के एक गांव में एक ही गणपति बप्पा विराजे जाते है।

कहां विराजे जाते है पूरे गांव के एक गणेशा

कर्नाटक, महाराष्ट्र और गोवा की सीमा से जुड़ा बेलगावी जिला गणेश उत्सव और अपनी खास परंपरा के लिए फेमस है। बेलगावी शहर में हर गली, हर घर में और सार्वजनिक और निजी तौर पर गणेश प्रतिमाएं स्थापित होती है लेकिन जिले में खानापुर तालुका में नंदगढ़ गांव है, जहां सिर्फ एक ही गणेश प्रतिमा स्थापित की जाती है। यह खास तरह की परंपरा काफी पुरानी है जो 1944 से चली आ रही है। इस परंपरा के अनुसार, गांव में पूरे गांव की ओर केवल एक प्रतिमा विराजित की जाती है। बताया जाता है कि, खास बात है कि इसमें सिर्फ हिंदू नहीं, बल्कि दूसरे समुदाय के लोग भी गणेश उत्सव मनाते हैं। पूरे गांव ने एक साथ गणपति स्थापित करते हुए मिसाल पेश की है। जहां पर हिंदू और मुस्लिम एकता में ही शक्ति है।

11 दिनों तक मनाते है उत्सव

इस गांव में गणेश उत्सव केवल एक दिन का उत्सव नहीं है यह सभी गांव के लोग एक साथ मिलकर मनाते है। यहां पर गांव के सभी लोग एक साथ मिलकर पूजा और ‘गणेश पूजा’ करते हैं. हर दिन एक सांस्कृतिक कार्यक्रम होता है. सभी जातियों और समुदायों के लोग मिलकर गणेश उत्सव मनाते हैं और 11वें दिन विसर्जन करते हैं। इस परंपरा को लेकर ग्रामीण बताते है।

गणेश समिति के एक सदस्य ने बताया कि कहा, “हम कई साल से ‘एक गांव, एक गणेश’ का संदेश दे रहे हैं, ताकि सबको यह महसूस हो कि हम एक हैं. इससे गांव की एकता भी मजबूत होती है और फिजूलखर्ची से भी बचा जा सकता है. पूरे गांव के लिए एक ही गणेश प्रतिमा की स्थापना एक बेहतरीन परंपरा है।”